The work is the same but the Chhattisgarh government pays Rs 13126 and in Madhya Pradesh it is Rs 5
विंध्य वाणी। मप्र पशु पालन विभाग द्वारा संचालित दुग्ध समृद्धि योजना द्वितीय चरण का कार्य पाँच रूपये में गौसेवक करने को तैयार नहीं है। गौसवक संघ रीवा के जिला अध्यक्ष विनोद तिवारी का कहना है कि गौसेवकों को ग्राम पंचायत स्तर पर एवं गौशालाओं में नियुक्ति कर छत्तीसगढ़ शासन की तरह 13126 रू मासिक मानदेय प्रदान किया जाय। मप्र पशु पालन विभाग से प्रशिक्षित गौसेवक रीवा जिले में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पशुओं का उपचार कृत्रिम गर्भाधान, एनआईपी 1, 2, 3, 4, 5 एवं गंभीर बीमारी लम्पी फंगस का कार्य करते हैं।
समय समय पर टीकाकरण, टैकिंग, आदि का कार्य विभाग के मार्गदर्शन में करते हैं। वर्तमान में भारत सरकार के राष्ट्रीय कार्यक्रम एनआईपी 3, 4, टीकाकरण एवं एनएडीसीपी टैकिंग का कार्य पशुपालन विभाग, गौसेवकों से काम ले रहे हैं। जोखिम भरा बधियाकरण का भी कार्य गौसेवकों से करवाया जा रहा है जिसमें दुर्घटना की संभावना सदैव बनी रहती है। गौसेवक मैत्री किसी दुर्घटना का शिकार होता है तो वह अपना ईलाज कराने में भी सक्षम नहीं है।
गौसेवक मैत्री द्वारा दुग्ध समृद्धि योजना का प्रथम चरण कार्य भी पूर्ण किया गया है परन्तु शासन द्वारा दुग्ध समृद्धि योजना द्वितीय चरण का कार्य भी 05 रू प्रति घर के हिसाब से देकर करवाना चाहती है लेकिन गौसेवक मैत्री यह कार्य करने में असमर्थता प्रकट कर रहे हैं। गौसवक संघ की मांग है कि ग्राम पंचायत स्तर पर नियुक्ति व छत्तीसगढ़ शासन के अनुसार मासिक मानदेय का निर्धारण कर दे तो सभी कार्य किये जायेगे।
गौसवक संघ रीवा के जिला अध्यक्ष विनोद तिवारी की मांग है कि दुग्ध समृद्धि योजना में गौसेवक मैत्री को घर-घर जाने में समय व खर्च लगभग 200 रू प्रतिदिन होगा जबकि शासन 05 रू में यह कार्य करवाना चाहता है वो भी एक वर्ष बाद मिलेगा। वर्तमान में एक दिन मजदूरी 500 रू होती है और गौसेवक को एक दिन में 5रू के हिसाब से 10 घर का 50 रू मिलेगा। गौसेवकों को ग्राम पंचायत स्तर पर एवं गौशालाओं में नियुक्ति कर छत्तीसगढ़ शासन की तरह 13126 रू मासिक मानदेय प्रदान किया जाय।
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