रीटायरमेंट की तारीख आई, सरकारी सेवा खत्म हुई… लेकिन कुर्सी ने शायद कह दिया—“इतनी जल्दी भी क्या है साहब, अभी तो उम्र बाकी है!” युवा नौकरी के लिए परीक्षा दे रहे हैं, फार्म भर रहे हैं, फीस जमा कर रहे हैं, सालों किताबों में सिर खपा रहे हैं। उधर सरकारी कुर्सियां भी बड़ी समझदार हैं—उन्हें पुराने चेहरों की आदत जो पड़ गई है! संजय गांधी अस्पताल में सेवानिवृत्त चिकित्सक की संविदा पर वापसी ने फिर वही सवाल खड़ा कर दिया—क्या सरकारी कुर्सियों को भी पुराने अनुभव की ऐसी लत लग गई है कि नए चेहरे दिखाई ही नहीं…
Author: Vindhya Vani
**रीवा।** एक तरफ प्रदेश का युवा रोजगार के लिए भटक रहा है, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों लगा रहा है और सरकारी नौकरी के सीमित अवसरों के बीच एक-एक पद के लिए संघर्ष कर रहा है। दूसरी तरफ सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारियों और चिकित्सकों का **कुर्सी से मोह खत्म होता नजर नहीं आ रहा**। रिटायरमेंट के बाद भी संविदा के रास्ते सरकारी व्यवस्था में वापसी और कम वेतन पर काम करने की तत्परता अब एक अलग तरह की बहस खड़ी कर रही है। संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में सेवानिवृत्त चिकित्सक **डॉ. अतुल सिंह की…
विश्वविद्यालय में कुलपति का पद सिर्फ प्रशासनिक कुर्सी नहीं, बल्कि पूरे संस्थान की गरिमा और विश्वास का प्रतीक होता है। ऐसे में पूर्व कुलपति से जुड़ा बताया जा रहा वीडियो और शोधार्थी छात्रा को लेकर सामने आ रहे गंभीर दावे महज इंटरनेट मीडिया की सनसनी मानकर नजरअंदाज नहीं किए जा सकते। सवाल यह नहीं कि वीडियो कितनी तेजी से वायरल हुआ, सवाल यह है कि आखिर इस वीडियो के पीछे की सच्चाई क्या है? अगर आरोप निराधार हैं तो उनकी सच्चाई सामने लाना जरूरी है। और यदि आरोपों में तथ्य है तो मामला कहीं अधिक गंभीर है। तब सवाल सिर्फ…
रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं पूर्व कुलपति के बताए जा रहे वीडियो ने विश्वविद्यालय के अकादमिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे वीडियो को लेकर एक शोधार्थी छात्रा से कथित संबंधों और पीएचडी के दौरान अनुचित व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह मामला प्रोफेसर के कार्यकाल के दौरान का है और सेवानिवृत्ति के बाद इससे जुड़े वीडियो सामने आए हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा…
रीवा। नौकरी दिलाने का झांसा देकर महाराष्ट्र के सतारा जिले ले जाए गए रीवा के पांच नाबालिग बच्चों सहित 10 श्रमिकों को जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से सकुशल मुक्त करा लिया गया। बंधक बनाए जाने की सूचना मिलने के बाद कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने पुलिस अधीक्षक गुरुकरण सिंह से समन्वय कर श्रम विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम महाराष्ट्र भेजी। टीम ने सतारा पुलिस और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से लोणंद तहसील क्षेत्र में कार्रवाई कर सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला और रीवा लेकर आई। मामला 11 सितंबर को सामने आया, जब सतारा में मौजूद एक नाबालिग ने…
रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में पत्रकारों को मुख्य द्वार पर रोकने की घटना अब केवल मीडिया के प्रवेश का मामला नहीं है। यह सीधे-सीधे जवाबदेही का सवाल है। यदि मीडिया के प्रवेश पर रोक लगाने का कोई अधिकृत आदेश नहीं था, तो फिर सुरक्षा गार्डों को पत्रकारों को रोकने का निर्देश किसने दिया? किस अधिकारी ने यह फैसला लिया? किसके कहने पर अस्पताल का गेट पत्रकारों के लिए बंद किया गया? और अब उस अधिकारी से जवाब कौन मांगेगा? कलेक्टर के मौके पर पहुंचने और यह स्पष्ट करने के बाद कि मीडिया के प्रवेश पर…
रीवा में इंसाफ की मांग का एक टेंट बुधवार को उखाड़ दिया गया। साथ ही उस टेंट में बैठा वह पिता भी उठा दिया गया, जो 14 दिन से अन्न-जल त्यागकर अपनी बेटी कल्पना और उसके नवजात बच्चे की मौत का जवाब मांग रहा था। प्रशासन की दलील है—पिता की जान बचाना जरूरी था। बिल्कुल, जान बचनी चाहिए। लेकिन फिर सवाल यह है कि जिस व्यवस्था को 14 दिन तक पिता की भूख नहीं दिखी, उसे 15वें दिन उसकी बिगड़ती हालत क्यों दिखाई दी? अगर स्वास्थ्य इतना गंभीर था तो इतने दिनों तक वह धरने पर क्यों बैठा रहा? उसकी…
रीवा। संजय गांधी अस्पताल में महिला की मौत के बाद सामने आए लापरवाही के मामलों का असर मरीजों के बीच दिखाई देने लगा है। अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मरीज अब जिला अस्पताल का रुख कर रहे हैं। बुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में उमड़ी भीड़ के बीच मरीजों और परिजनों में इसी बात की चर्चा रही। सुबह करीब 9 बजे से जिला अस्पताल में मरीजों की लंबी कतार लग गई, जो दोपहर 3 बजे तक बनी रही। सबसे ज्यादा भीड़ मेडिसिन विभाग में रही। मरीजों की संख्या अधिक होने के बावजूद चिकित्सकों ने…
रीवा। डाक विभाग में पदस्थ एक कर्मचारी के कथित सुसाइड नोट ने विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नोट में तीन अधिकारियों पर दबाव बनाकर हर महीने एक लाख रुपए रिश्वत मांगने और अब तक करीब आठ लाख रुपए वसूलने के आरोप लगाए गए हैं। कर्मचारी ने दावा किया है कि रकम नहीं देने पर एफआईआर दर्ज कराने और नौकरी से हटाने की धमकी दी जाती थी। हालांकि, सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। सुसाइड नोट के अनुसार सचिन दाहिया ककराली डाक विभाग में बीओ पद पर…
रीवा। संजय गांधी अस्पताल में 66 वर्षीय मरीज को मृत घोषित करने के बाद शव परिजनों को सौंपने का मामला सामने आया है। परिजन शव को लेकर घर जाने की तैयारी में थे और शरीर शव वाहन तक पहुंच चुका था। इसी दौरान मरीज के शरीर में हलचल और सांसें चलती दिखाई दीं। आनन-फानन में मरीज को वापस अस्पताल लाया गया, जहां उपचार शुरू किया गया। फिलहाल मरीज वेंटिलेटर पर है। सीधी निवासी गिरजा प्रसाद गुप्ता को 4 सितंबर की रात करीब 11.25 बजे बेहोशी की हालत में मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के मुताबिक भर्ती के…








