विंध्य वाणी रीवा। नगर निगम की इंजीनियरिंग शाखा में घूसखोरी का मामला एक बार फिर प्रकाश में आया है, एक बार फिर अनुज्ञा शाखा के लिए बनाए गए एबीपीएएस-2 वाट्सऐप ग्रुप की कथित चैट वायरल हुई है। जिसमें नगर निगम में अनुज्ञा शाखा में फाइलें लगाने वाले एक कंसल्टेंट ने नगर निगम अधिकारियों से घूस की रेट लिस्ट मांगी है। हालांकि यह कोई पहला मामला नहीं, इसके पूर्व भी इस प्रकार की चैट वायरल हो चुकी है लेकिन नगर निगम प्रशासन द्वारा जांच व कार्यवाही नहीं होने से इंजीनियरों का यह खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बता दें कि पूर्व में नगर निगम अधिकारियों को दिए गए रुपए का हिसाब भी वायरल हो चुका है लेकिन इसकी जांच नहीं की गई।यह है पूरा मामला…
बता दें कि शुक्रवार को नगर निगम रीवा एबीपीएएस-2 वाट्सऐप ग्रुप की एक चैट वायरल हुई, जिसमें कथित कंसल्टेंट ने लिखा कि ‘कृपया सभी उपयंत्री, सहायक यंत्री, कार्यपान यंत्री, बिल्डिंग परमिशन, बारातघर परमिशन, कमर्शियल बिल्डिंग परमिशन, कंपाउंडिंग परमिशन की रेट लिस्ट बता दीजिए, बहुत दिक्कत होती है, हितग्राही को बताने में कि किसको कितना पैसा (घूस) चाहिए, तब आपको मंजूरी मिलेगी। भले ही टीएनसीपी से आपकी मंजूरी हो, उससे नगर निगम को कोई मतलब नहीं है। नजूल एनओसी लगी उससे कोई मतलब नहीं है, मतलब सिर्फ पैसा (घूस) से है। रेट लिस्ट आप सभी दे दें, ताकि वो पैसा लिफाफे में डालके कमिश्नर सर के हाथों से आपको आपके उत्कृष्ठ कार्य के लिए आपकी महान कृपा जो परमिशन दे के आपने की है, आपको सम्मानित करा सकूं।’ बता दें कि इस चैट ने नगर निगम की इंजीनियरिंग शाखा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
पूर्व में वायरल हुआ था हिसाब
बता दें कि बीते 17 मई 2023 को एक हिसाब-किताब की रफ कॉपी सोशल मीडिया में वायरल हो रही थी, जिसमें वार्ड क्रमांक 8 में किसी व्यवसायिक भवन अनुज्ञा के नाम पर निगम के कंसलटेंट द्वारा आवेदक को हिसाब दिया जाना बताया गया था, जिसमें निगम अधिकारियों से लेकर डीसीआर सेल, कंम्प्यूटर ऑपरेटर तक के घूस का जिक्र किया गया था। पूरा हिसाब लाखों में है। हिसाब-किताब की वायरल रफ कॉपी में नगर निगम के एसई सहित ईई, सहायक यंत्री व उपयंत्री के नाम से 50-50 हजार रुपए प्रति अधिकारी व डीसीआर सेल के लिए 20 हजार व कंम्प्यूटर ऑपरेटर के लिए 10 हजार रुपए लिखे गए हैं। किसको कितना दिया या देना है, इसका हिसाब लिखा हुआ था।
सामने आ गई थी बिल्डिंग
बता दें कि इसी प्रकार वायरल लेटर में एडवांस का भी हिसाब था, यह हिसाब किताब भवन अनुज्ञा आवेदन जी प्लस 3 व्यवसायिक भवन एरिया 504/95 वर्गमीटर के लिए किया बताया गया है। जिसमें 6 सितंबर 2021, 16 अक्टूबर 2021 व 18 नवंबर 2021 को एडवांस राशि देना बताया गया है। वहीं नगर निगम को लगने वाली आरएमसी फीस करीब 173119 रुपए किसी सुधीर नाम के व्यक्ति द्वारा 10.12.2021 व 11.12.2021 को ऑनलाइन जमा करना बताया गया है। बता दें कि प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया कि यह बिल्डिंग किसी पवन कुमार सोनी पिता रामसुंदर सोनी व रामबाई सोनी पत्नी रामसुंदर सोनी वार्ड 8 की है। तत्कालीन निगम आयुक्त ने जांच कराकर कार्यवाही की बात कही थी लेकिन मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
यूसखोरी जैसे गंभीर मामले में तत्कालीन आयुक्त द्वारा जांच की बात कही गई थी लेकिन यह जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई, जो ऐसे भूमि स्वामियों के लिए चिंता का विषय है जो नियमतः भवन अनुज्ञा लेकर निर्माण कराना चाहते हैं। लगातार यूसखोरी को लेकर चैट वायरल हो रहे हैं, निगमायुक्त को इसे संज्ञान लेना चाहिए और इस पर रोक लगाई जानी चाहिए।
नीरज पटेल पूर्व वित्त प्रभारी ननि।



