अधिवक्ता द्विवेदी के अनुसार, शिकायत लेकर थाने पहुंचने पर कई मामलों में आवेदन लेने में भी देरी की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों को अपने क्षेत्र की जानकारी होती है, वह किसी तरह थाना सीमा स्पष्ट कर आवेदन रिसीव करा लेते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में आने वाले कई फरियादी आवेदन दिए बिना ही वापस लौट जाते हैं। अधिवक्ता मानवेन्द्र द्विवेदी ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में आवेदन स्वीकार किए जाने के बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वार्ड क्रमांक 13 स्थित शिव मंदिर में चोरी और वार्ड क्रमांक 26 में अवैध कब्जे से संबंधित शिकायतों में आवेदन लिए जाने के बाद भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि कई बार फरियादी को ही समझाइश देकर वापस भेज दिया जाता है।
अधिवक्ता ने हाल ही में अवैध शराब दुकान के खिलाफ विश्वविद्यालय थाना पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर भी चर्चा थी कि अवैध शराब दुकान संचालित करने वाले लोग इसे समान थाना क्षेत्र मानकर संचालित कर रहे थे। हालांकि इस संबंध में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अधिवक्ता मानवेन्द्र द्विवेदी ने कहा कि आमजन को थाने की इस कथित कार्यप्रणाली से परेशानी हो रही है। उन्होंने आईजी रीवा और एसपी रीवा से पूरे मामले को गंभीरता से संज्ञान में लेकर जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि समान थाना क्षेत्र में शाम ढलते ही ओवरब्रिज के नीचे शराबखोरी शुरू हो जाती है, जिससे यहां से आने-जाने वाले यात्रियों सहित छात्रों व महिलाओं को भारी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि जब मामला मीडिया में सामने आया तो आवेदन दिए जाने के 19 दिन बाद पुलिस वार्ड क्रमांक 13 शिव मंदिर चोरी मामले में जानकारी लेने गुरुवार को पहुंची थी।




