रीवा। शिक्षा विभाग में पदोन्नति और पदस्थापना से जुड़े नियमों को दरकिनार कर एडीपीसी का पद हासिल करने के आरोपों से घिरे प्रवीण शुक्ला की जांच दो महीने बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। कमिश्नर के निर्देश पर संयुक्त संचालक शिक्षा ने जिला शिक्षा अधिकारी से एक सप्ताह में तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा था। डीईओ ने दो प्राचार्यों की जांच समिति भी गठित कीए लेकिन अब तक जांच का निष्कर्ष सामने नहीं आया। इस बीच मामले की शिकायत आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल तक पहुंच गई है। शिकायतकर्ता ने गलत जानकारी के आधार पर हासिल पदोन्नति निरस्त करने और आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की मांग की है। अनंतपुर निवासी समाजसेवी प्रद्युम्न तिवारी ने शिकायत में आरोप लगाया है कि प्रवीण शुक्ला ने अंतर्निकाय संविलियन से जुड़ी जानकारी छिपाकर उच्च माध्यमिक शिक्षक से हाईस्कूल प्राचार्य के पद पर उच्च पद प्रभार हासिल किया। इसके बाद स्वयं को प्राचार्य बताकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रीवा में एडीपीसी (रमसा) का पद प्राप्त कर लिया। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। इससे पहले शिकायत कमिश्नर रीवा तक पहुंची थी। कमिश्नर ने संयुक्त संचालक शिक्षा नीरव दीक्षित को जांच के निर्देश दिए थे। जेडी ने डीईओ पीएल मिश्रा से एक सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा। इसके बाद डीईओ ने मार्तंड क्रमांक तीन के प्राचार्य रामलल्लू दीपांकर और माड़व के प्राचार्य विनोद अग्निहोत्री की दो सदस्यीय समिति गठित की थी। करीब दो महीने बाद भी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आने से कार्रवाई की गति पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में उच्च माध्यमिक शिक्षकों की प्रदेश स्तरीय वरिष्ठता सूची भी महत्वपूर्ण हो गई है। लोक शिक्षण संचालनालय की सूची में प्रवीण शुक्ला का वरिष्ठता क्रम पहले 312 बताया गया थाए जो संशोधन के बाद 2755 हो गया। एक अप्रैल 2026 की स्थिति में भी उनका वरिष्ठता क्रम 2755 दर्ज बताया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि अंतर्निकाय संविलियन और संशोधित वरिष्ठता सूची के तथ्यों की अनदेखी कर पदोन्नति की वैधता तय नहीं की जा सकती। अब शिकायत भोपाल पहुंचने के बाद जांच प्रक्रिया और अधिकारियों की जवाबदेही का मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। यदि जांच में नियम विरुद्ध पदोन्नति या पदस्थापना की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
वरिष्ठता सूची में 312 से 2755 हुआ क्रम
लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल की प्रदेश स्तरीय वरिष्ठता सूची में प्रवीण शुक्ला का क्रम पहले 312 था। संशोधन के बाद यह 2755 हो गया। शिकायतकर्ता ने इसी बदलाव और अंतर्निकाय संविलियन से जुड़े तथ्यों को जांच का प्रमुख आधार बनाने की मांग की है।
दो महीने बाद भी रिपोर्ट नहीं
डीईओ ने जांच के लिए मार्तंड क्रमांक तीन के प्राचार्य रामलल्लू दीपांकर और माड़व के प्राचार्य विनोद अग्निहोत्री की समिति बनाई थी। शिकायतकर्ता ने दोनों अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए करीबी संबंधों का आरोप लगाया है। इन आरोपों की पुष्टि होना बाकी है। अब भोपाल स्तर पर शिकायत पहुंचने के बाद जांच रिपोर्ट और विभागीय कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं।
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