रीवा। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली ग्रेच्युटी और एरियर्स की राशि के लिए एक बुजुर्ग कर्मचारी को सालभर से दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। मंगलवार को वह अपनी फरियाद लेकर नाती के सहारे कमिश्नर कार्यालय की जनसुनवाई में पहुंचा। उम्र इतनी अधिक है कि वह ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था। आर्थिक और शारीरिक परेशानी से परेशान बुजुर्ग ने भुगतान नहीं होने पर आत्महत्या करने तक की चेतावनी दे दी। शिकायत सामने आते ही अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया। शिकायतकर्ता रामलाल वर्मा शिक्षा विभाग के शिक्षा महाविद्यालय में भृत्य के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनका कहना है कि न्यायालय द्वारा नियमित कर्मचारी मानने के बाद भी उन्हें ग्रेच्युटी, समयमान वेतनमान और अन्य एरियर्स की राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। करीब एक साल से वह संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
स्थापना शाखा के लिपिक पर दुव्र्यवहार का आरोप
कमिश्नर को सौंपे गए आवेदन में रामलाल वर्मा ने महाविद्यालय के स्थापना प्रभारी लिपिक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब भी वह भुगतान की जानकारी लेने या अपनी राशि की मांग करने कार्यालय पहुंचते हैं तो संबंधित लिपिक दुव्र्यवहार कर उन्हें भगा देता है। भुगतान में देरी का कारण भी नहीं बताया जाता। बुजुर्ग ने कहा कि वह शारीरिक रूप से बेहद कमजोर हो चुके हैं और अकेले चलने-फिरने में भी परेशानी होती है। इसी वजह से उन्हें अपने नाती को साथ लेकर जनसुनवाई में पहुंचना पड़ा।
भुगतान नहीं हुआ तो आत्महत्या की चेतावनी
अपनी व्यथा बताते हुए बुजुर्ग ने आवेदन में कहा है कि यदि जल्द ही उनकी ग्रेच्युटी और एरियर्स की राशि का भुगतान नहीं किया गया तो वह आत्महत्या करने को मजबूर होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। उन्होंने प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर लंबित भुगतान कराने और जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि जनसुनवाई में पहुंची इस शिकायत पर प्रशासन कितनी जल्दी कार्रवाई करता है और बुजुर्ग को उसके हक की राशि मिल पाती है या नहीं।
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