रीवा। रीवा शहर कांग्रेस अध्यक्ष अशोक पटेल ‘झब्बू’ ने भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा के 15 वर्षों के कार्यकाल पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर रीवा की जनता कब तक विकास के दावे सुनेगी और कब उसे धरातल पर बदलाव दिखाई देगा? सांसद जी को अब भाषणों और दावों से आगे बढ़कर अपने 15 वर्षों के कार्यकाल का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए।
अशोक पटेल ‘झब्बू’ ने कहा कि भाजपा के नेता विकास की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन आम जनता के सवाल आज भी वहीं खड़े हैं। युवाओं को रोजगार चाहिए, मध्यमवर्गीय परिवारों को महंगाई से राहत चाहिए, मरीजों को अस्पतालों में बेहतर इलाज चाहिए और अभिभावकों को अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य की चिंता है। इन बुनियादी सवालों का जवाब कौन देगा?
उन्होंने सवाल किया कि 15 साल के कार्यकाल में रीवा के युवाओं के लिए रोजगार के कितने ठोस अवसर पैदा हुए? महंगाई से परेशान आम परिवारों को राहत दिलाने के लिए क्या प्रयास किए गए? अस्पतालों की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या पहल हुई? जनता को इन सवालों के जवाब चाहिए, न कि केवल विकास के दावे।
कांग्रेस शहर अध्यक्ष ने कहा कि रीवा में नशे की समस्या युवाओं और उनके परिवारों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। युवा देश और समाज का भविष्य हैं, लेकिन यदि वे नशे की गिरफ्त में फंस रहे हैं तो उन्हें बचाने के लिए प्रभावी अभियान, जागरूकता, बेहतर पुनर्वास सुविधाओं और रोजगार के अवसरों की जरूरत है। आखिर युवाओं के भविष्य को लेकर जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही कहां है?
उन्होंने सांसद पर निशाना साधते हुए कहा कि सांसद जनार्दन मिश्रा की पहचान विकास की बड़ी परियोजनाओं और जनसमस्याओं के समाधान के बजाय शौचालयों की सफाई जैसे कार्यों को लेकर चर्चा में रही है। स्वच्छता जरूरी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या रीवा की जनता ने सांसद को केवल सफाई के प्रदर्शन के लिए चुना था, या शहर के व्यापक विकास और जनता की समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी भी सौंपी थी?
अशोक पटेल ‘झब्बू’ ने कहा कि रीवा की जनता को यह जानने का अधिकार है कि बीते 15 वर्षों में शहर के लिए कौन-सी महत्वपूर्ण परियोजनाएं लाई गईं, कितने काम पूरे हुए और उनका आम नागरिकों को कितना लाभ मिला। सड़क, पेयजल, जल निकासी, स्वास्थ्य, रोजगार और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर केवल बयान देना पर्याप्त नहीं है। जनता परिणाम चाहती है और परिणामों का हिसाब भी।
उन्होंने कहा कि भाजपा के विकास संबंधी दावों की कसौटी जनता का जीवन होना चाहिए। यदि विकास हुआ है तो उसकी उपलब्धियां, खर्च और परिणाम सार्वजनिक किए जाएं। यदि समस्याएं बनी हुई हैं तो उनके समाधान की समय-सीमा बताई जाए।
अशोक पटेल ‘झब्बू’ का सीधा सवाल है—सांसद जनार्दन मिश्रा जी, 15 साल का हिसाब दीजिए! रीवा की जनता को बताइए कि रोजगार, स्वास्थ्य, महंगाई, नशे की समस्या और शहर के बुनियादी विकास के लिए आपने क्या ठोस काम किए?
लोकतंत्र में कुर्सी पद नहीं, जनता के प्रति जिम्मेदारी है। जनता सवाल पूछेगी, जनप्रतिनिधियों को जवाब देना होगा। रीवा को अब केवल दावों की राजनीति नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला विकास चाहिए।




