रीवा। नगर निगम रीवा की विकास शाखा के अंतर्गत आवंटित भवनों और भूखंडों की लीज को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ संपत्तियों का उपयोग आवंटन की मूल शर्तों के विपरीत किया जा रहा है, जबकि लीज डीड और नवीनीकरण की प्रक्रिया में भी नियमों का पालन नहीं किया गया। इससे नगर निगम को लाखों रुपये के संभावित राजस्व नुकसान की आशंका जताई गई है। मामले में मध्य प्रदेश शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने बुधवार को नगर निगम आयुक्त रीवा को पत्र भेजा है। पत्र में शिकायत का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने और कार्यालय को अवगत कराने हेतु कहा गया है। संचालनालय के पत्र के अनुसार, यह मामला शिकायतकर्ता शिवमोहन शर्मा की शिकायत से संबंधित है। शिकायत में नगर निगम रीवा की विकास शाखा के कर्मचारी आशीष त्रिपाठी एवं अन्य कर्मचारियों के माध्यम से आवंटित संपत्तियों की लीज प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। संचालनालय ने मामले को संज्ञान में लेते हुए नगर निगम आयुक्त से आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। लबे समय में एक ही कुर्सी में जमे होने से इस खेल की आशंका जताई गई है।
आवंटन की शर्तों से अलग उपयोग का आरोप
शासन से पहुंची जांच में शिकायत का प्रमुख बिंदु यह है कि नगर निगम की कुछ संपत्तियां जिन उद्देश्यों के लिए लीज पर आवंटित की गई थीं, उनका उपयोग बाद में अलग तरीके से किया जाने लगा। शिकायतकर्ता के अनुसारए कुछ भवनों का उपयोग आवासीय के साथ व्यावसायिक अथवा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी किया जा रहा है। आरोप है कि उपयोग में बदलाव के बावजूद लीज की शर्तों और उसके अनुरूप देय राशि का निर्धारण उचित तरीके से नहीं किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ संपत्तियों की लीज डीड पूरी करने या उसका नवीनीकरण करने के दौरान नियमों का पालन नहीं किया गया। आरोप के मुताबिक, संपत्तियों का वास्तविक उपयोग बदलने के बावजूद आवासीय दरों के आधार पर राशि जमा कराकर लीज प्रक्रिया पूरी की जा रही है। शिकायतकर्ता ने इस व्यवस्था से नगर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचने की आशंका जताई है।
वर्ष 2016 के नियम और 2021 के संशोधन का हवाला
शिकायत में मध्य प्रदेश नगर पालिका (अचल संपत्ति अंतरण) नियम 2016 और वर्ष 2021 में किए गए संशोधन का उल्लेख किया गया है। दस्तावेजों में इन नियमों से संबंधित मध्य प्रदेश राजपत्र की प्रतियां भी संलग्न हैं। राजपत्र के संलग्न पृष्ठों में लीज, संपत्ति के उपयोग, नवीनीकरण और शर्तों के उल्लंघन से संबंधित प्रावधानों का विवरण दिखाई देता है। ऐसे में मामले की जांच के दौरान संबंधित संपत्तियों की मूल आवंटन शर्तों और लागू नियमों के बीच तुलना करना जरूरी होगा। शिकायतकर्ता का दावा है कि यदि व्यावसायिक उपयोग वाली संपत्तियों की लीज आवासीय दरों पर जारी या नवीनीकृत की गई है तो नगर निगम को निर्धारित राजस्व से कम राशि प्राप्त हुई होगी। इसी आधार पर लाखों रुपये की क्षति की आशंका जताई गई है।
जांच में संपत्तियों का रिकॉर्ड होगा अहम
इस मामले में निष्पक्ष जांच के लिए आवंटित भवनों और भूखंडों की सूची, मूल लीज डीड, नवीनीकरण की तारीख, स्वीकृत उपयोग, वर्तमान उपयोग और जमा शुल्क का मिलान महत्वपूर्ण होगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन मामलों में नियमों का पालन हुआ और कहां किसी तरह की अनियमितता या राजस्व अंतर की स्थिति बनी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर निगम रीवा शिकायत के आधार पर क्या जांच करता है और संचालनालय को क्या रिपोर्ट भेजता है।
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