The lawyers said… a case should be registered….
विंध्य वाणी, रीवा। नगर निगम में फर्जी दस्तावेजों में दी गई भवन अनुज्ञा के मामले में अधिकारियों का मौन कई बड़े सवाल खड़ा करता जा रहा है। अधिकारियों के मौन ने इस मामले को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है, बड़ा फर्जीवाड़ा आने के बाद भी किसी प्रकार की कोई कार्यवाही अब तक निगम प्रशासन द्वारा नहीं की गई। जबकि लगातार इसका खुलासा प्रदेश के सबसे बड़े अखबार दैनिक जागरण द्वारा किया जा रहा है। दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के अनुसार अधिकारी आज-कल कार्यवाही की बात कहते हुए मामले को दबाने में लगे हुए हैं, वहीं अब नवागत निगमायुक्त अक्षत जैन ने मामले में हैरानी कर देने वाला बयान दिया है। भवन अनुज्ञा में 4 वर्ष बाद प्रस्तुत किया गया गलत शपथ पत्र को लेकर उनका कहना है कि 21 बिंदुओ का शपथ पत्र में अलग-अलग दिनांक होना कोई बड़ी त्रुटि नहीं हैं। वहीं इस मामले में बिना हस्ताक्षर के दिया गया दूसरा शपथ पत्र को भी सही मान रहे हैं और उनका कहना है कि हितग्राही से हस्ताक्षर करा लिया गया है। वहीं अधिवक्ताओं ने इसे अपराधिक कृत्य बताया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि शपथ में पत्र में छेड़छाड़ किया जाना व ऐसे छेड़छात्र वाले शपथ पत्र के आधार पर किसी प्रकार की स्वीकृति दे देना बिल्कुल गलत है। अधिवक्ता इस मामले में जांच कर सख्त कार्यवाही व ऐसा करने वालो पर अपराधिक मामला दर्ज कराए जाने की बात कह रहे हैं। बहरहाल निगमायुक्त के इस बयान ने मामले में एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। निगमायुक्त की जांच भी अभी तक खत्म नहीं हो पाई है। अधिकारियों का कहना है कि फाइल को विधिक राय के लिए लॉ आफिसर अभिषेक कुमार के पास भेजा गया है, महीना बीतने को आया लेकिन फाइल नहीं लौटी। जब दैनिक जागरण ने इस मामले को लेकर अधिवक्ताओं व नोटरी से बात की तो उन्होंने इसे पूरी तरह से गलत बताया और मामले में कार्यवाही किए जाने की बात कही।
क्या है पूरा मामला…
दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के अनुसार बीते 30 दिसंबर 2025 को नगर निगम के सहायक यंत्री अंबरीश सिंह द्वारा अपने सेवानिवृत्त के ठीक एक दिन पहले बाणसागर स्थित आराजी क्रमांक 631/2 रकवा 04050 हे. में से 2030 वर्गमीटर रकवा मौजा समान पटवारी हल्का समान तहसील हूजूर में विश्वनाथ सिंंह पिता रामजी सिंह निवासी वार्ड क्रमांक 25 समान रीवा को मंजूरी दी गई है। इस मंजूरी के संबंध में लगाए दस्तावेजों में कमी बताई जा रही है, बताया जा रहा है कि इस अनुज्ञा के लिए जो 21 बिंदुओ का शपथ पत्र आवेदक विश्वनाथ सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया है, इस शपथ पत्र को नोटरी 2 जून 2021 में किया गया था, इतना ही नहीं नोटरी करने वाले अनिल श्रीवास्तव ने जो सील लगाई है, उसमें उनके पंजीयन की वैधता भी 12 दिसंबर 2023 की ही है लेकिन इस शपथ पत्र को प्रस्तुत किया गया 8 नवंबर 2025 की तारीख डालकर, जबकि तारीख 2 जून 2021 की होनी चाहिए। अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया। जबकि कोई भी शपथ पत्र बनने के बाद 6 माह बाद तक ही उपयोग किया जा सकता है और शपथ पत्र में अलग-अलग दिनांक फर्जीवाड़े का दर्शाता है। इसके साथ एक अन्य शपथ पत्र लिया गया जिसमें शपथपत्र कर्ता के ही हस्ताक्षर नहीं कराए गए और उसे मान्य कर दिया गया। मतलब साफ है कि अधिकारियों ने इस बड़े दस्तावेज में अनदेखी कर डाली। इसके साथ ही आवासीय डायवर्सन, लैंडयूज, लगाए गए खसरे में कई कमियां हैं। वहीं बताया गया कि फाइल खाली प्लॉट पर लगाई गई थी लेकिन यहां पहले से कच्चा मकान बना हुआ था और इसका टैक्स भी आवासीय जमा किया गया है। जिसे गिराकर अब निर्माण शुरु किया गया। इन सब कमियों के बाद भी अधिकारी कार्यवाही की बात कहते हुए फाइल दबाए बैठे हैं।
निगमायुक्त जो कह रहे संभव नहीं
जानकारों की माने भवन अनुज्ञा ऑनलाइन होती है और उसमें जो दस्तावेज लगाए जाते हैंवह ऑनलाइन फीड भी होते हैं। जिन दस्तावेजों के आधार पर अनुज्ञा दी गई है उन्हें बदला नहीं जा सकता और न ही पोर्टल से हटाया जा सकता है। तो जो निगमायुक्त कह रहे हैं कि शपथ पत्र में हस्ताक्षर करा लिए जाएंगे यह संभव नहीं है? बड़ा सवाल यह भी है कि इस प्रकार के प्रकरणों की इस प्रकार की नर्मी आखिर क्यों? एक समग्र आईडी अपडेट कराने वाले को दस्तावेजो के लिए चक्कर लगवाए जा रहे हैं और इस फर्जीवाड़े में अधिकारी मौन स्वीकृति देते बैठे हुए हैं। यदि कार्यवाही नहीं होती है तो इस प्रकार के मामलों को बढ़ावा मिलेगा और इस प्रकार के फर्जी दस्तावेजों पर इस प्रकार की स्वीकृति देने वाले अधिकारी मनमानी करने से पीछे नहीं हटेंगे।
क्या कहते हैं अधिवक्ता…
जब शपथ पत्र बनता है तो उसमें जिस दिनांक को वह बनवाया जाता है और जिस दिनांक को नोटरी होती है वहीं दिनांक हर जगह पर अंकित होनी चाहिए। अलग-अलग दिनांक यदि अंकित है तो जाहिर है कि इसमें छेड़छाड़ की गई है और इसे अपने मन के अनुसार कूटरचित तरीके से उपयोग करने के लिए ऐसा किया गया है। जो पूरी तरह से दंडिक अपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है। विभाग प्रमुख को ऐसे शपथ पत्र के आधार पर दी गई स्वीकृति को तो निरस्त करना ही चाहिए, साथ ही इस प्रकार का शपथ पत्र प्रस्तुत करने वालो के खिलाफ अपराधिक मामला भी दर्ज कराया जाना चाहिए।
मानवेन्द्र द्विवेदी, अधिवक्ता जिला न्यायालय।
——–
शपथ पत्र के साथ छेड़छाड़ करना टेपरिंग की श्रेणी में आता है, कूटरचित मनगढ़ंत अभिलेख तैयार करना अपराध की श्रेणी में आता है। किसी भी शपथ पत्र में स्वयं से परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। नगर निगम में लगाया गया इस प्रकार शपथ पत्र पूरी तरह से गलत है। जिस दिनांक को शपथ पत्र बना उसी वहीं दिनांक हर जगह होना चाहिए, यदि अलग-अलग दिनांक हैं तो गलत है। नगर निगम में फर्जीवाड़ा कोई आम बात नहीं है, बिना अधिकारियों के सह के फर्जी दस्तावेजों को मान्य किया जाना संभव नहीं है। ऐसे दस्तावेजों के आधार पर दी गई स्वीकृति निरस्त कर अपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए।
बीके माला, अधिवक्ता/समाजसेवी।
——–
शपथ पत्र में जो दिनांक नोटरी द्वारा डाली गई है, वहीं दिनांक को बना हुआ वह शपथ पत्र माना जाएगा। यदि इसमें दिनांक और स्थान को रिक्त रहने दिया गया और बाद में उसे किसी अन्य तारीख डालकर प्रस्तुत किया गया है तो यह पूरी तरह से गलत है। इसकी जांच नोटरी कर्ता से कराई जा सकती है कि वह शपथ पत्र कब बनाया गया? शपथ पत्र को इस प्रकार से प्रस्तुत करना गलत है और अपराधिक कृत्य है। लोक सेवक के समक्ष यदि फर्जी शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया है तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 216 के तहत संबंधित अधिकारी की शिकायत पर तीन वर्ष का कारावास एवं जुर्माना से दंडित करने का प्रवधान है।
शंभूनाथ द्विवेदी, अधिवक्ता जिला न्यायालय।
——–
किसी भी शपथ पत्र की बैधता उसके बनने से 6 माह तक की होती है, उसके बाद इसे उपयोग नहीं किया जा सकता है। शपथ पत्र में जो दिनांक नोटरी द्वारा डाला गया है वह दिनांक को बना हुआ वह माना जाना चाहिए। कई ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं कि फर्जी तरीके से सील व हस्ताक्षर कर नोटरी के नाम से शपथ पत्र प्रस्तुत कर दिए जाते हैं। ऐसे मामलो पर सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए। 2 जून 2021 को बना शपथ पत्र 11 नवंबर 2025 में मान्य किया जाना गलत है।
योगेन्द्र शुक्ला, नोटरी रीवा।
——–
भवन अनुज्ञा में 21 बिंदुओ का लिया गया शपथ पत्र एक सबड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज है और जिस समय आवेदन किया गया उसी समय का नोटरी वाला शपथ पत्र लिया जाना चाहिए। पुराने शपथ पत्र पर नई तारीख डालकर प्रस्तुत करना गलत है इसे मान्य नहीं किया जाना चाहिए। यदि कूटरचित दस्तावेजों से भवन अनुज्ञा हुई तो उसे निरस्त किया जाना चाहिए।
एसएल दहायत, सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री ननि रीवा।
—–
फर्जी दस्तावेजों पर दी गई कोई भी स्वीकृति पूरी तरह से गलत है, इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। यदि ऐसे मामलो पर कार्यवाही नहीं की जाती और हितग्राही को स्वीकृति के बाद दस्तावेज सुधारने का मौका दिया जाता है तो वह भी गलत है। भविष्य में लोग इस प्रकार की त्रुटि करने में बिल्कुल भी नहीं सोचेंगे और न ही संबंधित अधिकारियों को किसी प्रकार की कार्यवाही का भय होगा।
अरूण मिश्रा, सेवानिवृत्त उपायुक्त ननि रीवा।
००००००००००




