सीधी। जिले में गोपद नदी की 18 रेत खदानों के ठेके को लेकर राजस्व हानि और कथित अवैध परिवहन का मामला सामने आया है। मेसर्स शक्ति एंटरप्राइजेज पर आरोप है कि एक ही ई-ट्रांजिट पास (ई-टीपी) का बार-बार इस्तेमाल कर वाहनों से रेत का परिवहन कराया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि 82 करोड़ रुपये के वार्षिक ठेके के बावजूद पर्यावरणीय स्वीकृति की सीमित मात्रा के आधार पर शासन को करीब 20 करोड़ रुपये ही भुगतान किए जाने की व्यवस्था है। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या ई-टीपी के कथित दुरुपयोग से शासन को मिलने वाले राजस्व पर और असर पड़ रहा है?
शिकायत के अनुसार, जिले की 18 खदानों में से फिलहाल पांच खदानों का संचालन हो रहा है। इसी दौरान रेत के उत्खनन और परिवहन की प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। मामले में खनिज साधन विभाग के प्रमुख सचिव और मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम के प्रबंध संचालक से उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
33 घंटे की ई-टीपी पर तीन से चार फेरे लगाने का आरोप
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, 13 अक्टूबर के बाद सात घंटे के स्थान पर 33 घंटे की वैधता वाले ई-टीपी जारी किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि इसी अवधि में एक ही ई-टीपी पर एक डंपर से तीन से चार बार तक रेत का परिवहन किया जा रहा है। शिकायत में पांच वाहनों के ई-टीपी को प्रमाण के तौर पर संलग्न करने की बात कही गई है।
यदि एक ही पास पर बार-बार परिवहन की पुष्टि होती है, तो यह खनिज परिवहन व्यवस्था और राजस्व गणना की जांच का गंभीर विषय होगा। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित विभागों की विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
82 करोड़ का ठेका, पर्यावरणीय स्वीकृति 3.18 लाख घनमीटर
जानकारी के अनुसार, सीधी जिले का रेत खनन ठेका मेसर्स शक्ति एंटरप्राइजेज को 16 लाख घनमीटर वार्षिक रेत मात्रा के लिए 82 करोड़ रुपये की निविदा राशि पर आवंटित किया गया है। दूसरी ओर, वर्तमान में खदानों के लिए 3.18 लाख घनमीटर वार्षिक मात्रा की पर्यावरणीय स्वीकृति उपलब्ध होने की बात कही गई है।
इसी आधार पर ठेकेदार को जबलपुर उच्च न्यायालय से अंतरिम राहत मिलने और स्वीकृत मात्रा के अनुपात में करीब 20 करोड़ रुपये वार्षिक भुगतान की व्यवस्था होने का दावा किया गया है। ऐसे में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि न्यायालय के अंतरिम आदेश में भुगतान की क्या शर्तें निर्धारित हैं और स्वीकृत मात्रा के अनुरूप वास्तविक उत्खनन कितना हो रहा है।
सीधी से सहारनपुर तक परिवहन पर भी सवाल
शिकायत में सीधी से सहारनपुर तक रेत ले जाने वाले वाहनों की ई-टीपी वैधता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। दोनों स्थानों के बीच लगभग 950 किलोमीटर की दूरी का हवाला देते हुए पूछा गया है कि 33 घंटे की अवधि में परिवहन की वास्तविक स्थिति क्या है और एक ही पास पर कितने चक्कर दर्ज किए जा रहे हैं।
गोपद नदी के पानी में भारी मशीनें उतारकर रेत उत्खनन किए जाने की बात भी उठाई गई है। शिकायतकर्ताओं ने खनिज विभाग के साथ पुलिस और राजस्व अमले की भूमिका की जांच की मांग की है। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत के आरोपों की पुष्टि अभी जांच का विषय है।
एआई जांच द्वार और सीसीटीवी फुटेज से खुल सकता है मामला
सीधी-रीवा और सीधी-मऊगंज मार्गों पर खनिज विभाग द्वारा एआई आधारित जांच द्वार और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन कैमरों की रिकॉर्डिंग, वाहनों के पंजीयन नंबर और पोर्टल पर दर्ज ई-टीपी विवरण का मिलान कराया जाए तो एक ही पास पर बार-बार हुए परिवहन की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
उन्होंने मांग की है कि संबंधित अवधि के सभी ई-टीपी, वाहन आवागमन का विवरण, खनन की मात्रा और भुगतान अभिलेखों की जांच कराई जाए। यदि नियमों के उल्लंघन और राजस्व हानि की पुष्टि होती है, तो संबंधित ठेकेदार तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई कर शासन को हुई क्षति की वसूली की जाए।
खनिज निगम के एमडी ने कही जांच की बात
मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम के प्रबंध संचालक ए. फ्रेंक नोबल ने कहा, “एक टीपी पर यदि एक से अधिक गाड़ी जाती हैं, तो गलत है। इसकी जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
अब निगाहें जांच पर हैं। ई-टीपी के अभिलेखों और सीसीटीवी रिकॉर्ड का मिलान होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि परिवहन में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं और शासन को किसी प्रकार की राजस्व हानि हुई है या नहीं।




