When the wedding procession of ‘The Great Showman’ arrived in Baghelkhand.
भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी महान अभिनेता, निर्माता और निर्देशक राज कपूर का नाम लिया जाता है, तो उन्हें हिंदी सिनेमा के ‘द ग्रेट शोमैन’ के रूप में याद किया जाता है किंतु बहुत कम लोगों को ज्ञात है कि राज कपूर का मध्य प्रदेश के रीवा शहर से भी एक आत्मीय और ऐतिहासिक संबंध रहा है। यही शहर उनकी ससुराल था और यहीं उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय लिखा गया था।
राज कपूर का विवाह 12 मई 1946 को रीवा के सिरमौर चौराहा स्थित बंगले में कृष्णा मल्होत्रा के साथ संपन्न हुआ था। आज उसी ऐतिहासिक स्थल पर कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम स्थित है, जो कपूर परिवार की स्मृतियों और रीवा की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है। कृष्णा कपूर का जन्म 30 दिसंबर 1930 को हुआ था और उनका बचपन रीवा में बीता। उनके पिता करतारनाथ मल्होत्रा तत्कालीन रीवा राज्य में आईजी के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने रीवा के एस.के. स्कूल में शिक्षा प्राप्त की थी। राज कपूर और कृष्णा कपूर के विवाह की कहानी भी अत्यंत रोचक है। बताया जाता है कि राज कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर एक बार अपनी नाटक मंडली के साथ रीवा आए थे। इसी दौरान उनकी मित्रता आईजी करतारनाथ मल्होत्रा से हुई। समय के साथ यह मित्रता पारिवारिक संबंध में परिवर्तित हो गई। जब युवा राज कपूर रीवा आए, तब पहली ही मुलाकात में वे कृष्णा से प्रभावित हुए और विवाह के लिए सहमत हो गए।
उस दौर में मुंबई से रीवा तक की यात्रा आसान नहीं थी। बारात ट्रेन से सतना पहुँची, जहाँ से बारातियों ने लॉरी, तांगा, बैलगाड़ी और कारों के माध्यम से रीवा की यात्रा पूरी की। विवाह के समय कृष्णा कपूर की आयु मात्र 16 वर्ष और राज कपूर की 22 वर्ष थी। विवाह के बाद राज कपूर का फिल्मी सफर निरंतर ऊँचाइयों की ओर बढ़ता गया। 2 जून 1988 को 63 वर्ष की आयु में अस्थमा के बिगडऩे के कारण राज कपूर का निधन हो गया, किंतु उनकी सिनेमाई विरासत को उनके पुत्र ऋ षि कपूर, रणधीर कपूर और राजीव कपूर ने आगे बढ़ाया।
राज कपूर की स्मृतियों को संजोने के लिए रीवा में उनके विवाह स्थल पर कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम के निर्माण की पहल की गई। इसका भूमिपूजन रणधीर कपूर ने किया तथा उद्घाटन समारोह में प्रेम चोपड़ा और प्रेम किशन जैसे फिल्मी कलाकार उपस्थित रहे।
राज कपूर और रीवा का यह संबंध केवल एक वैवाहिक रिश्ते की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा और बघेलखंड की सांस्कृतिक विरासत के अद्भुत संगम का जीवंत उदाहरण है। आज भी जब राज कपूर का नाम लिया जाता है, तो रीवा गर्व के साथ उस ऐतिहासिक संबंध को याद करता है जिसने इस शहर को भारतीय फिल्म इतिहास से जोड़ दिया।




