रीवा। डाक विभाग में पदस्थ एक कर्मचारी के कथित सुसाइड नोट ने विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नोट में तीन अधिकारियों पर दबाव बनाकर हर महीने एक लाख रुपए रिश्वत मांगने और अब तक करीब आठ लाख रुपए वसूलने के आरोप लगाए गए हैं। कर्मचारी ने दावा किया है कि रकम नहीं देने पर एफआईआर दर्ज कराने और नौकरी से हटाने की धमकी दी जाती थी। हालांकि, सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
सुसाइड नोट के अनुसार सचिन दाहिया ककराली डाक विभाग में बीओ पद पर कार्यरत हैं। कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि उनकी माताजी के खाते में अनजाने में अधिक लेन-देन होने के बाद तत्कालीन अधिकारियों ने उनके खिलाफ कार्रवाई का दबाव बनाया। आरोप है कि एफआईआर दर्ज कराने और नौकरी से हटाने की धमकी देकर उनसे लगातार रकम की मांग की गई।
गहने गिरवी रखकर रकम देने का दावा
कर्मचारी ने नोट में दावा किया है कि अधिकारियों के दबाव के कारण उसने अपनी माताजी और बहन के गहने तक गिरवी रख दिए और कथित तौर पर रिश्वत की रकम चुकाई। उसके अनुसार तीन अधिकारियों को मिलाकर वह अब तक करीब आठ लाख रुपए दे चुका है। इसके बावजूद कथित रूप से मांग बंद नहीं हुई।
‘हर महीने एक लाख दो, वरना कार्रवाई’
सुसाइड नोट में आरोप लगाया गया है कि एसपी और एसडीआई स्तर के अधिकारियों की ओर से हर महीने करीब एक लाख रुपए देने का दबाव बनाया जाता था। रकम नहीं देने पर एफआईआर और नौकरी से हटाने की धमकी दिए जाने का दावा कर्मचारी ने किया है। कर्मचारी के अनुसार लगातार रकम देने के कारण उसके बीओ का बैलेंस बढ़ता गया और आर्थिक दबाव भी बढ़ता चला गया।
संचार मंत्री से कार्रवाई की मांग
कर्मचारी ने अपने परिवार को निर्दोष बताते हुए मामले में उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उसने संचार मंत्री से कार्रवाई की अपील करते हुए कहा है कि किसी अन्य जीडीएस कर्मचारी को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
जांच के बाद ही साफ होगी सच्चाई
सुसाइड नोट में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं, लेकिन फिलहाल इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी सामने नहीं आया है। ऐसे में आरोपों की वास्तविकता, कथित लेन-देन और जिम्मेदारी तय करने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कथित रूप से रकम लेने में कौन जिम्मेदार है।



