Cases of fraud are continuously coming to light in the building permission branch
विंध्य वाणी, रीवा। नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर अब सवाल उठने लगे हैं, एक बार फिर व्यवस्था पुराने ठर्रे पर ऊतर आई है, शायद वजह यह है कि इन निगम प्रशासन अब शिकायतों की अनदेखी करने लगा है, अधिकारियों द्वारा किए गए कारनामों पर अब कार्यवाही की जगह पर्दा डाला जा रहा है। लोग फिर शिकायत के बाद कार्रवाई न होने से हताश होकर मुख्य निगम कार्यालय के द्वार पर दिखने लगे हैं। गुरुवार को एक बुजुर्ग अपनी शिकायत को लेकर भटकते दिखे। मामला और कुछ नहीं नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा में हुए फर्जीवाड़े का ही था। उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश को दरकिनार कर अधिकारियों ने भवन अनुज्ञा जारी कर दी। जबकि लगातार आवेदक द्वारा नगर निगम को शिकायत कर उक्त बात की जानकारी दी जा रही है।
हैरानी इस बात की है कि अधिकारियों की इस मनमानी कार्यप्रणाली पर अब शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। मामला पूरी तरह से बाणसागर तलैया भवन अनुज्ञा मामले की तरह है, जहां प्रशासन द्वारा दावा तो किया जा रहा है कि उक्त भूमि सरकारी है लेकिन लोकसेवक ही प्रशासन के दावे को दरकिनार कर उस पर भवन अनुज्ञा जारी कर रहे हैं और अधिकारी हैं कि हितग्राही द्वारा फर्जी दस्तावेजों पर ली गई भवन अनुज्ञा में बचाव के तरीके खोजने में लगे हैं। यह कहना इसलिए भी गलत नहीं होगा कि नवागत निगमायुक्त के पद्भार संभालते ही इस मामले के सामने आने के बाद भी अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।
यह है एक और भवन अनुज्ञा का फर्जीवाड़ा
सारदा पुरम पयासी टोला समान वार्ड 15 निवासी एमपी सिंह ने बताया कि उनके स्वत्व व अधिपत्य की भूमि आराजी खसरा क्र 216/1 रकबा 0.67ए. का अंश रकबा 12 बाई 70 मतलब 840 वर्गफिट तिवारी होटल के सामने ग्राम रतहरा तह.हुजूर नगर जिला रीवा (मण्प्र) में स्थित है जिसे विक्रय अनुबंध पत्र के माध्यम से प्रार्थी ने अतिक्रमांक दुर्वेशर पटेल एवं बैजनाथ पटेल व उसके परिवार के सदस्यों से क्रय किया था। उक्त भूमि के सम्बन्ध में प्रार्थी व अतिक्रामक सहित उसके परिवार के सदस्यों के विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में प्रकरण क्र.एफए 597/2021 विचाराधीन है एवं उक्त प्रकरण में माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर ने आदेश दिनांक 16/12/2021 को उभयपक्षों को यथा स्थित बनाये रखने हेतु आदेश पारित किया गया था तथा आदेश दिनांक 16/12/2021 के उपरांत प्रकरण में दिनांक 27.7.2022, 27.9.2022 तथा अंतिमवार दिनांक 20.7.2023 को सुनवाई हुई थी एवं माननीय उच्च न्यायालय ने दोनो पक्षों को यथा स्थित बनाये रखने हेतु आदेश पारित किया था एवं उक्त आदेश आज दिनांक तक प्रभावी है किन्तु अतिक्रामक दुर्वेशर पटेल एवं बैजनाथ पटेल माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना कर प्रार्थी की भूमि पर बल पूर्वक भवन निर्माण कर रहे है, जिसकी भवन अनुज्ञा भी नगर निगम द्वारा जारी कर दी गई है। आवेदक ने उक्त मामले की शिकायत कई बार की लेकिन अभी तक किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई। जिससे निगम की वर्तमान लचर व्यवस्था पर सवाल खड़ा होने लगे हैं।
विधिक राय मिली, फिर भी खमोश
समाचार पत्रों के मुताबिक बीते 30 दिसंबर 2025 को नगर निगम के सहायक यंत्री अंबरीश सिंह द्वारा अपने सेवानिवृत्त के ठीक एक दिन पहले बाणसागर स्थित आराजी क्रमांक 631/2 रकवा 04050 हे. में से 2030 वर्गमीटर रकवा मौजा समान पटवारी हल्का समान तहसील हूजूर में विश्वनाथ सिंंह पिता रामजी सिंह निवासी वार्ड क्रमांक 25 समान रीवा को मंजूरी दी गई है। इस अनुज्ञा के लिए जो 21 बिंदुओ का शपथ पत्र आवेदक विश्वनाथ सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया है, इस शपथ पत्र को नोटरी 2 जून 2021 में किया गया था, इतना ही नहीं नोटरी करने वाले अनिल श्रीवास्तव ने जो सील लगाई है, उसमें उनके पंजीयन की वैधता भी 12 दिसंबर 2023 की ही है लेकिन इस शपथ पत्र को प्रस्तुत किया गया 8 नवंबर 2025 की तारीख डालकर, जबकि तारीख 2 जून 2021 की होनी चाहिए। अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया। जबकि कोई भी शपथ पत्र बनने के बाद 6 माह बाद तक ही उपयोग किया जा सकता है और शपथ पत्र में अलग-अलग दिनांक फर्जीवाड़े का दर्शाता है। बता दें कि फाइल विधिक राय के लिए लॉ आफिसर अभिषेक कुमार पास भेजी गई थी, उन्होंने दस्तावेजों की जांच के लिए लिखा लेकिन अब अधिकारी मौन साधे बैठे हैं, चर्चा है कि अधिकारियों का कहना है कि जिस शपथ पत्र में गलती है वह भवन अनुज्ञा के लिए जरूरी नहीं है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब जरूरी नहीं तो शपथ पत्र लिया ही क्यूं जा रहा है और यदि लिया गया तो फर्जीवाड़ा करने वाले पर एफआईआर दर्जै कराई जाए। नगर निगम में हुए प्रशासनिक बदलाव के बाद जो उम्मीद जनता को थी वह अब टूटती दिख रही है। चर्चा में तो अब यह भी कहा जा रहा है कि बीच में बंद हुई वित्तीय सुविधा अब एक बार फिर शुरु हो गई है। मनमानी पर कार्यवाही नहीं हो रही है। हालांकि अब यह चर्चाएं कितनी सही हैं कितनी गलत यह तो जांच में ही सामने आएगा। दलबदलू पूर्व सांसद के दखल की भी चर्चा मामले में हैं और कहा जा रहा है कि दबाव में कोई कार्यवाही नहीं हो रही।
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