Bansagar Talaiya permission case: Corporation Commissioner in action; beneficiary given final opportunity to present his side…
रीवा। बाणसागर तलैया भवन अनुज्ञा मामले में निगम प्रशासन एक बार फिर एक्शन मोड में है। निगम प्रशासन द्वारा एक बार फिर शासन के नियमानुसार कार्यवाही के पूर्व जारी किया जाने वाला अंतिम नोटिस हितग्राही को दिया गया है। जिसमें हितग्राही को पक्ष रखने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। हालांकि निगम प्रशासन की जांच में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ली गई भवन अनुज्ञा का मामला सामने आ चुका है। मामले में हितग्राही से जवाब तलब करने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। निगमायुक्त अक्षत जैन के निर्देशानुसार कार्यवाही की जा रही है। मामले की शिकायत अधिवक्ता मानवेन्द्र द्विवेदी द्वारा नगर निगम आयुक्त से की गई थी। हालांकि हितग्राही द्वारा किए गए निर्माण कार्य को फिलहाल नहीं रोका गया है, उसके द्वारा दिन रात निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
क्या है मामला…
बता दें कि बीते 30 दिसंबर 2025 को नगर निगम के सहायक यंत्री अंबरीश सिंह द्वारा अपने सेवानिवृत्त के ठीक एक दिन पहले बाणसागर स्थित आराजी क्रमांक 631/2 रकवा 0.4050 हे. में से 2030 वर्गमीटर रकवा मौजा समान पटवारी हल्का समान तहसील हुजूर में विश्वनाथ सिंह पिता रामजी सिंह निवासी वार्ड क्रमांक 25 समान रीवा को मंजूरी दी गई है। जबकि इस भूमि को सरकारी मानते हुए प्रशासन द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। जानकारी के मुताबिक तत्कालीन कलेक्टर प्रतिभा पाल ने मामले में नोडल अधिकारी तत्कालीन निगम कमिश्रर डॉ.सौरभ सोनवणे को बनाया था और उन्होंने ही याचिका भी दायर कराई लेकिन उन्हीं के कार्यकाल में उन्हें के अधिनस्थ रहे एसडीओ अंबरीश सिंह ने सेवानिवृत्त के ठीक एक दिन पहले भवन अनुज्ञा उक्त खसरे के कुछ हिस्से में जारी कर दी। अनुज्ञा को देने के लिए एसडीओ ने प्रशासन के दावे को तो दरकिनार किया ही है बल्कि फर्जी दस्तावेजों को भी मान्य किया गया, इस अनुज्ञा के लिए जो 21 बिंदुओ का शपथ पत्र आवेदक विश्वनाथ सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया है, इस शपथ पत्र को नोटरी 2 जून 2021 में किया गया था, इतना ही नहीं नोटरी करने वाले अनिल श्रीवास्तव ने जो सील लगाई है, उसमें उनके पंजीयन की वैधता भी 12 दिसंबर 2023 की ही है लेकिन इस शपथ पत्र को प्रस्तुत किया गया 8 नवंबर 2025 की तारीख डालकर, जबकि तारीख 2 जून 2021 की होनी चाहिए थी। कोई भी शपथ पत्र बनने के बाद 6 माह बाद तक ही उपयोग किया जा सकता है और शपथ पत्र में अलग-अलग दिनांक फर्जीवाड़े का दर्शाता है। इसके साथ ही लैंडयूज, खसरा में कृषि भूमि सहित टैक्स रहवासी का काटा गया लेकिन प्लॉट खाली बताते हुए अनुज्ञा जारी की गई। इस तरह की तमाम कमियों के बाद भी अनुज्ञा जारी कर दी गई।
निरस्त की जा सकती है अनुज्ञा
अधिकारियों की माने तो भवन अनुज्ञा में लगाए गए दस्तावेजों में कमियां है और उनके आधार पर हितग्राही को अनुज्ञा दिया जाना गलत है, जिससे अनुज्ञा को निरस्त किया जाना है। शासन के नियमानुसार उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है, हालांकि हितग्राही अपना पक्ष कुछ भी रखे अनुज्ञा का निरस्त होना तय है क्योंकि भवन अनुज्ञा ऑनलाइन दी जाती है और जिस दस्तावेजो के आधार पर अनुज्ञा दी गई है उनमें सुधार नहीं किया जा सकता है और न ही उन्हें बदला जा सकता है।
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अनुज्ञा मामले में हितग्राही को अंतिम पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया गया है, तीन दिन का समय उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए दिया गया है। इसके बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।
सिद्वार्थ सिंह, कार्यपालन यंत्री नगर निगम रीवा।
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