New initiative by Higher Education Commissioner (IAS) Prabal Sipaha: The state will now conduct ‘SAAC’ assessments modeled on NAAC, with grades awarded based on standards
विंध्य वाणी, भोपाल। प्रदेश के शासकीय विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग ने नई पहल शुरू की है। यह पहल करने वाला मप्र देश का पहला राज्य है। अब कॉलेजों का मूल्यांकन केवल राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक)के मानकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विभाग की ओर से राज्य मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद् (सैक)का भी मूल्यांकन होगा। इस माध्यम से कॉलेजों में नैक की तैयारी का विस्तृत निरीक्षण कराया जाएगा। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने कार्य योजना तैयार कर ली है और जल्द ही प्रदेशभर के महाविद्यालयों में निरीक्षण प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार सैक का उद्देश्य महाविद्यालयों की वास्तविक शैक्षणिक और प्रशासनिक स्थिति का आकलन करना है, ताकि कमियों की पहचान कर समयबद्ध सुधार सुनिश्चित किया जा सके। यह व्यवस्था नैक की तर्ज पर विकसित की गई है लेकिन इसमें राज्य स्तर की आवश्यकताओं और चुनौतियों को भी शामिल किया गया है। मानक पूरा करने वाले कॉलेजों की ग्रेडिंग भी की जाएगी। वहीं बताया गया कि नैक 2.0 भी जल्द आएगा, अब नैक मूल्यांकन के बाद मिली ग्रेडिंग की अवधि तभी खत्म कर दी जाएगी जब वह निर्धारित मानक को पूरा करना बंद कर देगा, पहले ऐसा नहीं होता था, दूसरे मूल्यांकन तक ग्रेडिंग रहती थी।
इन बिंदुओं पर होगी गहन जांच
सैक निरीक्षण के दौरान महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था, विद्यार्थियों की उपस्थिति, परीक्षा परिणाम, शोध गतिविधियां, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं, खेल सुविधाएं, आईसीटी आधारित शिक्षण, डिजिटल संसाधन, छात्र कल्याण योजनाएं, नवाचार, प्रशासनिक पारदर्शिता, वित्तीय प्रबंधन, स्वच्छता, हरित परिसर और अधोसंरचना का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा। इसके अलावा कॉलेजों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, कौशल आधारित पाठ्यक्रम, रोजगारोन्मुख गतिविधियों और विद्यार्थियों के समग्र विकास से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा होगी।
स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट भी होगी अनिवार्य
निरीक्षण से पहले प्रत्येक महाविद्यालय को निर्धारित प्रारूप में स्व-मूल्यांकन रिपोट तैयार कर प्रस्तुत करनी होगी। इसके आधार पर विशेषज्ञ दल कॉलेज का भौतिक निरीक्षण करेगा और विभिन्न बिंदुओं पर अंक प्रदान करेगा। निरीक्षण के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सुधार संबंधी सुझाव दिए जाएंगे।
गुणवत्ता सुधार पर रहेगा विशेष फोकस
उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से कॉलेजों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और संस्थान अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए अधिक गंभीर होंगे। जिन महाविद्यालयों में कमियां मिलेंगी, उन्हें निर्धारित समय सीमा में सुधार करने के निर्देश दिए जाएंगे। बेहतर प्रदर्शन करने वाले महाविद्यालयों को प्रोत्साहन भी दिया जा सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सैक मूल्यांकन को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो प्रदेश के महाविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा। इससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल, आधुनिक संसाधन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण उपलब्ध होगा। साथ ही नैक की तैयारी कर रहे कॉलेजों को भी इस व्यवस्था से लाभ मिलेगा, क्योंकि उन्हें पहले से ही आवश्यक मानकों के अनुरूप खुद को तैयार करने का अवसर मिल सकेगा।
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कॉलेजों में अब राज्य मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद् (सैक) का निरीक्षण होगा, इसमें निर्धारित मानकों के आधार पर कॉलेजों को परखा जाएगा। नैक में अच्छी ग्रेडिंग के लिए कॉलेज तैयार होंगे और उनको मदद मिलेगी। जल्द ही निरीक्षण शुरु कराए जाएंगे।
प्रबल सिपाहा आईएएस, आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग मप्र।
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