MAUGANJ: Hurt by NEET paper leak, Mauganj student commits suicide in Nagpur
रीवा। मऊगंज जिले की एक होनहार छात्रा ने कथित रूप से नीट परीक्षा पेपर लीक प्रकरण से आहत होकर नागपुर में आत्महत्या कर ली। मृतका नागपुर में पिता के साथ रहकर पढ़ती और कठिन मेहनत कर परीक्षा दिया था। वह चयन से आशान्वित थी और पेपर लीक मामला सामने के बाद दुबारा परीक्षा के निर्णय से टूट गई और वहीं आत्म हत्या कर लिया। इसके बाद परिजन रीवा आए। घटना की जानकारी होने पर एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाकड़ व इंदौर जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े रविवार को रीवा आए और युकां अध्यक्ष रीवा अनूप सिंह चंदल व एनएसयूआई जिला अध्यक्ष पंकज उपाध्याय व अन्य कार्यकर्ताओं के साथ पीडि़त परिजनों से मिलने उसके गृह ग्राम मगनिया पुरवा जिला मऊगंज पहुंचे। इस अवसर पर परिजनों को ढाढ़स बंधाते हुए पीडि़त परिजनों को 2.5 लाख मदद राशि भी सौंपी। साथ ही केंद्र सरकार को जिम्म्ेदार ठहराते हुए भत्र्सना भी की।
बताया गया कि मृतका आकांक्षा चतुर्वेदी एक मेधावी छात्रा थीं और उन्हें नीट परीक्षा में लगभग 650 अंक प्राप्त होने की उम्मीद थी। लेकिन जिस परीक्षा व्यवस्था पर लाखों विद्यार्थियों का भविष्य निर्भर करता है, उसी व्यवस्था में हुई कथित अनियमितताओं, लापरवाही और भ्रष्टाचार ने एक प्रतिभाशाली बेटी की जान ले ली। पीडि़त छात्रा के पिता गंभीर रूप से पैरालिसिस (लकवा) की बीमारी से पीडि़त हैं। इस अवसर पर परिवार जनों ने बताया कि छात्रा की उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उसके पिता ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से लगभग 3 लाख का ऋण लिया था। परिवार का कहना है कि नीट परीक्षा में हुए पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली पर उठे गंभीर सवालों के कारण छात्रा मानसिक रूप से अत्यंत आहत थी। इस दुखद घटना के बाद परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका है। इस पर एनएसयूआई राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाकड़ ने पीडि़त परिवार को सांत्वना देते हुए हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने बताया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के निर्देशानुसार एनएसयूआई द्वारा परिवार को तत्काल राहत के रूप में किसान क्रेडिट कार्ड के ऋण की राशि में से 2.5 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है तथा शेष राशि भी शीघ्र उपलब्ध कराई जाएगी। इस अवसर पर विनोद जाकड़ ने केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या छात्रों की जान और उनका भविष्य सरकार के लिए कोई मायने नहीं रखता? उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक केवल एक परीक्षा में हुई गड़बड़ी नहीं है, बल्कि यह लाखों मेहनती छात्रों के सपनों, संघर्षों और उनके विश्वास की हत्या है। बतादें कि छात्रा ने सुसाइड नोट में दुबारा परीक्षा न दे पाने और माता-पिता का सपना पूरा कर पाने की बात उल्लेखित कर 21 मई को आत्म हत्या कर लिया था।
पांच करोड़ क्षत्रिपूर्ति मांगी
उन्होंने कहा कि एनएसयूआई भारत सरकार से मांग करती है कि पीडि़त परिवार को 5 करोड़ का आर्थिक मुआवजा, परिवार के भाई-बहनों में से एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा परिवार के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। विनोद जाकड़ ने कहा कि एनएसयूआई इस दुख की घड़ी में प्रत्येक पीडि़त परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। संगठन देशभर में पेपर लीक माफिया और शिक्षा व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तथा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) पर कार्रवाई की मांग को लेकर संगठन का संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। इस अवसर पर एनएसयूआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मंजुल त्रिपाठी, एनएसयूआई मध्यप्रदेश के प्रदेश सचिव रवि सुमित सिंह, यूथ कांग्रेस के विष्णु सिंह, रोहित यादव, शिवेंद्र गुप्ता (शिब्बू) सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
युकां प्रदेशाध्यक्ष भी पहुंचे
मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष यश घनघोरिया व अभिज्ञान शुक्ला भी रीवा पहुंचे और संगठनात्मक चर्चा की। यश का रीवा में विशेष स्वागत किया गया। इस अवसर पर विपिन मिश्रा, पूर्व प्रदेश सचिव एनएसयूआई सर्वेश मिश्रा, पूर्व प्रदेश सचिव अर्पित पाण्डेय, यूथ कांग्रेस वरिष्ठ जिला महासचिव शुभम प्रसाद कुशवाहा, सुभाष चंद्र बोस छात्र संघ जिला अध्यक्ष प्रिंस कुशवाहा, पंकज साकेत आदि उपस्थित रहे।
रीवा व मऊगंज के नेताओं को क्यों पता नहीं लगा
रविवार को जब एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जांगड़ जब रीवा पहुंचे तब रीवा और मऊगंज के नेताओं (खासकर कांग्रेस) को पता चला। नीट छात्रा की मौत 21 मई को हुई थी। इस बीच कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी, प्रदेश प्रभारी व राष्ट्रीय महासचिव हरीश चौधरी सहित कई स्थानीय बड़े नेता भी रीवा मऊगंज दोनो जिलों में कार्यकर्ता प्रशिक्षण में शामिल हुए लेकिन वह इस घटना से अनजान रहे। भोपाल में प्रदर्शन करने वाले मऊगंज में पीडि़ता तक आखिर क्यों नहीं पहुंच पाए। रीवा व मऊगंज नेताओं ने भी यह जानने की कोशिश नहीं की। कहीं न कहीं कार्यकर्ताओं से संवाद की कमी है ही कहा जाय कि स्थानीय नेता ही इतनी बड़ी घटना को नहीं जान पाए और राष्ट्रीय नेतृत्व को जानकारी हो गई।




