रीवा।ऐतिहासिक गोविंदगढ़ तालाब की गहराई और जलभराव क्षेत्र का आकलन करने के लिए की जा रही ड्रोन मैपिंग के दौरान कैमरे में विशालकाय मगरमच्छ कैद हुआ। पानी की सतह पर तैरते कई फीट लंबे मगरमच्छ का वीडियो सामने आने के बाद तालाब में मौजूद जलीय जीवों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि तालाब में ऐसे एक हजार से अधिक मगरमच्छ मौजूद हैं। हालांकि इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पानी की सतह पर दिखी हलचल, जूम करने पर नजर आया मगरमच्छ
तालाब के जलभराव क्षेत्र और गहराई का सर्वे करने के लिए ड्रोन उड़ाया गया था। इसी दौरान कैमरे में पानी के बीच हलचल दिखाई दी। फुटेज को जूम करने पर पानी की सतह पर एक विशाल मगरमच्छ तैरता नजर आया। सर्वे के दौरान सामने आया यह दृश्य लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गया।
ग्रामीण बोले- तालाब में बड़ी संख्या में मगरमच्छ
स्थानीय लोगों के मुताबिक गोविंदगढ़ तालाब में लंबे समय से मगरमच्छ देखे जाते रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब के बड़े क्षेत्रफल और जलकुंभियों के बीच 1000 से ज्यादा मगरमच्छ हो सकते हैं। कई बार मगरमच्छों को तालाब के किनारे धूप सेंकते हुए भी देखा गया है। हालांकि वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक सर्वे जरूरी होगा।
शाही इतिहास से जुड़ा है गोविंदगढ़
गोविंदगढ़ तालाब सिर्फ जलीय जीवों के कारण ही नहीं, बल्कि अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए भी जाना जाता है। यह क्षेत्र रीवा रियासत की ग्रीष्मकालीन राजधानी रहा है। 19वीं सदी में रीवा के महाराजाओं के शासनकाल में तालाब और गोविंदगढ़ महल का निर्माण कराया गया था। प्राकृतिक सुंदरता के साथ ऐतिहासिक विरासत के कारण यह क्षेत्र पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है।
ड्रोन फुटेज ने बढ़ाई उत्सुकता: तालाब में विशाल मगरमच्छ की मौजूदगी सामने आने के बाद अब वन विभाग और प्रशासन के स्तर पर यदि विस्तृत सर्वे कराया जाता है तो यहां मौजूद मगरमच्छों की वास्तविक संख्या, उनका क्षेत्र और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।




