सीधी.जिले में रेत के उत्खनन और परिवहन को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। गोपद नदी क्षेत्र की डोल-1, डोल-2, भरूही, पोड़ी और गोतरा रेत खदानों में मशीनों के जरिए उत्खनन किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, परिवहन में लगे डंपरों द्वारा एक ही ई-टीपी पर तीन से चार फेरे लगाए जाने की शिकायत भी चर्चा में है। मामला खनिज परिवहन के नियमों और विभागीय निगरानी के लिहाज से गंभीर है। ऐसे में खनिज विभाग की भूमिका और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। राजस्व एवं पुलिस की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। रेत के उत्खनन और परिवहन के लिए निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना खनिज विभाग की जिम्मेदारी है।
खदानों में स्वीकृत क्षेत्र, निर्धारित मात्रा और अनुमति की शर्तों के अनुरूप ही उत्खनन किया जाना चाहिए। इसी तरह परिवहन के दौरान ई-टीपी और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की वैधता भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में गोपद नदी क्षेत्र की पांचों खदानों में उत्खनन की स्थिति और डंपरों की आवाजाही की जांच जरूरी हो गई है। गोपद नदी की डोल-1, डोल-2, भरूही, पोड़ी और गोतरा खदानों में नियमों को ताक पर रख उत्खनन की गतिविधियां चर्चा में हैं। मशीनों से रेत निकाले जाने के मामले में यह जांच आवश्यक है कि संबंधित खदानों की स्वीकृत शर्तें क्या हैं और इस्तेमाल किए जा रहे उपकरणों की अनुमति है या नहीं। स्वीकृत खनन योजना और लागू नियमों के आधार पर ही इसकी वैधता तय की जा सकती है। वही रेत परिवहन में ई-टीपी का इस्तेमाल खनिज की आवाजाही का रिकॉर्ड रखने के लिए किया जाता है। ऐसे में एक ही ई-टीपी पर डंपरों द्वारा तीन से चार फेरे लगाए जाने की शिकायत गंभीर जांच का विषय है। संबंधित वाहनों के नंबर, ई-टीपी का विवरण, परिवहन का समय, रेत की मात्रा और गंतव्य का मिलान करने से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। यदि एक ही ई-टीपी का नियमों के विरुद्ध दोबारा इस्तेमाल पाया जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
खनिज एवं संबंधित विभागों की निगरानी पर सवाल
गोपद नदी में संचालित पांचों खदानों की गतिविधियों और परिवहन व्यवस्था की नियमित निगरानी जरूरी है। सवाल यह है कि खदानों से निकलने वाले वाहनों के दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर की जा रही है और ई-टीपी के उपयोग की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कैसे होता है। यदि नियमों के उल्लंघन की शिकायतें मिल रही हैं, तो विभाग को मौके पर जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही राजस्व एवं पुलिस विभाग की जिम्मेदारी भी है कि उनके द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर निगरानी करते हुए कार्रवाई सुनिश्चित करें।
राजस्व और पर्यावरण, दोनों पर पड़ सकता है असर
रेत का मनमानी उत्खनन और नियमों के विरुद्ध परिवहन शासन के राजस्व को प्रभावित कर सकता है। अनियंत्रित उत्खनन से नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसलिए डोल-1, डोल-2, भरूही, पोड़ी और गोतरा खदानों में उत्खनन की मात्रा, मशीनों के उपयोग और परिवहन में ई-टीपी की स्थिति की जांच आवश्यक है। जिम्मेदारों को खदान संचालकों और परिवहनकर्ताओं के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की जरूरत है। विभागीय जांच से ही स्पष्ट होगा कि गोपद नदी क्षेत्र में खनन और परिवहन की गतिविधियां निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित हो रही हैं या नहीं।




