रीवा। जिले में पिछले 72 घंटे से बारिश का दौर जारी है। रीवा के साथ मैहर और सतना जिले में भी रुक-रुककर हो रही बारिश का असर जनजीवन पर दिखाई दे रहा है। लगातार बारिश के कारण तराई क्षेत्र में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने लगा है। खासतौर पर त्योंथर क्षेत्र से होकर बहने वाली टमस नदी और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की जा रही है।
जिले में एक सितंबर को 35.3 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई। इस दौरान हुजूर तहसील में सर्वाधिक 71 मिलीमीटर बारिश हुई। इसके अलावा जवा में 65, गुढ़ में 42, त्योंथर में 34, मनगवां में 20, रायपुर कर्चुलियान में 18, सेमरिया में 17 और सिरमौर में 15 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।
गुढ़ में सबसे ज्यादा 946 मिमी बारिश
एक जून से एक सितंबर तक जिले में 631 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज हो चुकी है। तहसीलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो गुढ़ में सबसे अधिक 946 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। हुजूर में 788.3, रायपुर कर्चुलियान में 685.3, जवा में 681, सिरमौर में 581.4, सेमरिया में 499, मनगवां में 435 और त्योंथर में 432 मिलीमीटर बारिश हुई है।
हालांकि पिछले वर्ष इसी अवधि में जिले में 742.4 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई थी। जिले की सामान्य औसत वर्षा 1044.6 मिलीमीटर है। इस लिहाज से इस वर्ष अब तक हुई बारिश सामान्य औसत से कम है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश ने नदी-नालों के जलस्तर को बढ़ा दिया है।
बाणसागर के आठ गेट खोले, सोन में छोड़ा जा रहा पानी
लगातार बारिश और बांध में पानी की आवक बढ़ने के बीच बाणसागर बांध का जलस्तर भी अधिकतम सीमा के करीब पहुंच गया है। बांध का अधिकतम जलस्तर 341.64 मीटर है। जलस्तर 341.62 मीटर पहुंचने के बाद 30 अगस्त को दोपहर दो बजे से बांध के छह गेट दो-दो मीटर खोले गए थे। पानी की अधिक आवक को देखते हुए 31 अगस्त को गेटों की संख्या बढ़ाकर आठ कर दी गई।
बाणसागर बांध से इस समय 3374 क्यूमेक्स पानी सोन नदी में छोड़ा जा रहा है। इसके चलते सोन नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। नदी के किनारे बसे सीधी और सिंगरौली जिले के गांवों के लिए जलस्तर बढ़ने की चेतावनी जारी की गई है। कई स्थानों पर सोन नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है।
तराई क्षेत्र में बढ़ी निगरानी
बारिश के लगातार बने रहने और बाणसागर से पानी छोड़े जाने के कारण तराई क्षेत्र में नदी-नालों के जलस्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। टमस नदी और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में वृद्धि के चलते नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। प्रशासन द्वारा जलस्तर और बारिश की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।




