Guru Purnima was celebrated with great fervor in the district; devotees prostrated themselves before Chirhulanath, revering Him as their Guru
रीवा। जिले में बुधवार को आषाढ़ पूर्णिमा यानी गुरुपूर्णिमा धूमधाम से मनाई गई। शास्त्रों के अनुसार गुरुपूर्णिमा के दिन गुरुजनों की श्रद्धापूर्वक पूजा का विधान है। गुरुजन के न होने पर सामान्यत: श्रद्धालु भगवान शिव, हनुमान जी व सूर्यदेव को भी गुरु मानकर उनकी पूजा कर सकते हैं। इसी कारण जिले के अतिप्राचीन मंदिर चिरहुलानाथ धाम में रविवार को आस्था का सैलाब उमड़ा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ चिरहुलानाथ के दरबार में उपस्थिति देने पहुंची। इस अवसर पर पुलिस को पार्किंग आदि व्यवस्था बनाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। बहरहाल, श्रद्धालुओं की भक्ति में कोई खलल नहीं पड़ा। चिरहुलानाथ के दरबार में मानस पाठ आदि का आयोजन हुआ। इस दौरान भण्डारा प्रसाद वितरण का आयोजन भी कई लोगों द्वारा कराया गया। गुरुपूर्णिमा के अवसर पर लगे मेले में जिले के दूरदराज से भी श्रद्धालुगण पहुंचे, जिन्होंने कथा आदि का आयोजन मंदिर परिसर में कराया। उल्लेखनीय है कि आषाढ़ पूर्णिमा व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जानी जाती है। मान्यता है कि आज के दिन महर्षि वशिष्ठ के पौत्र और पाराशर ऋ षि के पुत्र तथा शुकदेव के पिता वेदव्यास जी का प्राकट्य हुआ था। अत: यह पूर्णिमा व्यास जी को समर्पित एक पवित्र पर्व के रूप में मनाई जाती है। गुरु व्यास 28वें व्यास थे, जो द्वापर युग में हुए थे। उन्होंने चतुर्वेदों के अतिरिक्त 18 पुराण, उपपुराण, महाभारत और व्यास संहिता जैसे आदि ग्रंथों का लेखन किया। पुराणों में व्यास जी ने अष्टांग आयुर्वेद का वर्णन किया है। महाभारत का लेखन कार्य श्री गणेश जी ने व्यास जी से करवाया था तथा अन्य वेद, पुराणों की रचना की थी। भगवान वेद व्यास अजर अमर माने गए हैं तथा उनकी महत्ता इससे प्रतिपादित होती है कि भगवान श्री कृष्ण ने गीता में भी उनका स्मरण किया है।
जगह-जगह हुआ प्रसाद का वितरण
वहीं, गुरुपूर्णिमा के अवसर पर शिष्यों ने विधि-विधान से अपने गुरुओं की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया। कई शिष्यों ने अपने गुरुजनों के घर जाकर उनका आशीर्वाद लिया। तो कई शिष्य फोन पर बात कर ही अपने गुरु के प्रति श्रद्धा प्रकट करते रहे। इस प्रकार लगभग पूरे दिन गुरु पूर्णिमा का महात्म्य लोगों के बीच देखने को मिला। इस अवसर पर जगह-जगह भण्डारा प्रसाद वितरण का आयोजन भी हुआ। श्रद्धालुओं ने सांई मंदिर, बोदाबाग, सिरमौर चौराहा, मानस भवन आदि कई क्षेत्रों में सड़क पर स्टॉल लगाकर प्रसाद वितरित किया।
अन्य देवस्थलों में भी रही भीड़
शहर के लक्ष्मणबाग मंदिर में चारोंधाम के देवी-देवताओं का दर्शन लाभ पाने बहुतायत में लोग पहुंचे, जहां गुरुओं का आशीर्वाद भी श्रद्धालुओं ने लिया। ऐसे ही रामसागर, खेमसागर मंदिर, महामृत्युंजय मंदिर किला परिसर, पंचमठ धाम, बसामन मामा धाम, गैवीनाथ धाम, देवतालाब मंदिर, गुढ़ कष्टहरनाथ मंदिर, समान स्थित शनि देव मंदिर सहित अन्य देवस्थलों में श्रद्धालु पूरे दिन हवन-पूजन कार्यक्रम में व्यस्त रहे।
साईं मंदिर में हुआ भजन संध्या का आयोजन
इसी तरह कोठी कम्पाउंड स्थित साईं मंदिर में भी भक्तों का तांता दर्शन के लिए लगा रहा, जहां पूजन कार्यक्रम के बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। सुबह कांकड़ आरती के बाद दोपहर में महाप्रसाद का वितरण किया गया व शाम को सांई भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तों की भीड़ जुटी रही। यातायात व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी। इससे पूर्व शोभायात्रा का आयोजन किया गया।
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