Order to remove illegal settlement of Jhiria situated next to Law College
रीवा। शहर की कई महत्वपूर्ण सरकारी जमीने खाली कराने के बाद अब प्रशासन ने लॉ कॉलेज के बाजू में कई एकड़ सरकारी जमीन पर दशकों से बसी अवैध बस्ती को खाली करने का फरमान जारी किया है। बस्ती खाली करने का फरमान मिलते ही यहां बसे लोगों में हड़कंप मच गया है। इस बस्ती के लोगों को नजूल तहसीलदार ने बरसात के पूर्व जमीन खाली करने का नोटिस दिया है। जिला प्रशासन की नजर उन सभी सरकारी जमीनों पर है जहां लोगों ने अवैध रूप कब्जा कर रखा है। शहर के निराला नगर, पुलिस लाइन आदि का दशकों पुराने अतिक्रमण हटाने के बाद जिला प्रशासन द्वारा झिरिया की सरकारी जमीन को खाली कराने की योजना तैयार की गई है। इस जमीन की कीमत करोड़ों में बताई जा रही है। इसके साथ ही यह बस्ती डूब क्षेत्र में भी आती है। यहां पर लगभग डेढ़ सौ लोग रहते हैं और इन्हें सरकार की तरफ से मिलने वाली सड़क पानी बिजली सहित अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराई गई है लेकिन अब इन्हें यहां से बेदखल होने का आदेश जारी कर दिया गया है, जिस कारण बस्ती के लोग परेशान हैं। इस बस्ती की महिलाएं कलेक्टर की जनसुनवाई मेंं भी गई थीं।
50 वर्षों से कर रहे निवास, अचानक आवास खाली करने नोटिस
– मोहल्ले की महिलाओं ने कलेक्टोरेट कार्यालय पहुंच कर की आवास की मांग
रीवा। शहर के वार्ड क्रमांक 6 झिरिया मोहल्ला स्थित बस्ती मेंं निवासरत लोगों को राजस्व मामले में नजूल तहसीलदार नोटिस जारी कर यहां से आवास खाली करने के निर्देश देते हुए कहा कि जहां भी जाना हो जाओ, यहां के आवास खाली कर दो। जिसके चलते झिरिया बस्ती की महिलाएं कलेक्टोरेट कार्यालय पहुंची और उन्होंने आवास देने की मांग रखी। शिकायत करने आई महिला राजकुमारी वर्मा, लीला सोधिया, अनिता सोधिया, ललिता सिंह, सोनू साकेत, किरण सोधिया, कुसुम सोधिया, भूरा साकेत, कुसुम सोनी, सावित्री साकेत, फुलवा सोधिया, मामू सोधिया, आशा सोधिया, कुसुम सोधिया, उर्मिला शर्मा, प्रेमवती साकेत, प्रेमवती रावत, लाला सोधिया, सुधा सोधिया, वीनू सांधिया, मनीषा शर्मा, भीमसेन साकेत, सुनीता सोधिया, शकुन्तला सोधिया, करुणा कोल, छोटी साकेत, संध्या सोधिया, शकुन्तला साकेत, अर्चना सिंह राठौड़, संदीप सोधिया, प्रतिभा साकेत ने बताया कि वे लोग यहां पुरखों के समय से निवास करते चले आ रहे, उन्होंने बिजली कनेक्शन ले रखे हैं, नल कनेक्शन ले रखे हैं, वोटर आईडी यहां के पते पर आती है, राशन कार्ड यहां के पते पर बने हैं। आधारकार्ड यहां के पते के बने हैं, यदि उन्हें हटाना ही है तो पहले उन्हें आवास प्रदान किए जाएं ताकि वे लोग आवासों में शिफ्ट हो सकें, बरसात होने में एक माह से भी कम समय बचा है, ऐसे में यहां निवासरत करीब 150 से अधिक परिवारों के सदस्य अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर बरसात में कहां जाएंगे? महिलाओं ने बताया कि जहां वे लोग निवास कर रहे हैं वह शासकीय भूमि है और यहां पर फिल्टर प्लांट बनाने की योजना है, जिनके इसी भूमि पर बड़े व पक्के आवास बने हैं, उन्हें उक्ताशय का नोटिस नहीं दिया गया। महिलाओं ने बताया कि उनके द्वारा उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल को भी इस संबंध में आवेदन दिया गया है।
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