Horrifying! The heatwave has left Rewa district with 1,084 vultures
विंध्य वाणी, रीवा। शुक्रवार से शुरु हुई तीन दिवसीय ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना रविवार को समाप्त हो गई। इस तीन दिवसीय गणना में चौकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। वर्तमान में भीषण गर्मी का असर गिद्धों पर भी भारी पड़ रहा है। शीतकाल की अपेक्षा वर्तमान में मात्र 39 प्रतिशत ही गिद्ध जिले में रह गए हैं। 61 प्रतिशत गिद्धों ने रीवा छोड़ दिया। बता दें कि तीन दिवसीय गणना में जो आंकड़े सामने आए हैं उसके अनुसार तीन दिन में कुल 691 गिद्धों की गणना की गई। जबकि शीतकालीन गणना में कुल 1775 गिद्ध मिले थे। जानकारी के मुताबिक वन विभाग के द्वारा ग्रीष्मकालीन गणना 22 से 24 मई तक की जा गई है। रविवार को भी अंतिम दिन प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना-2026 के अंतर्गत द्वितीय चरण में ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना के पहले दिन वन अमला प्रात: 5.30 बजे से ही वन क्षेत्र में गिद्धों की पहचान एवं गणना के लिए पूर्ण सजगता एवं गंभीरता के साथ जुट गया। गणना कार्य वैज्ञानिक पद्धति के अनुसार मोबाइल एप्लीकेशन और डाटा शीट के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में गिद्धों की वास्तविक संख्या एवं उनकी उपस्थिति का आकलन किया जा सके।
इस प्रकार हुई गणना
बता दें कि पहले दिन शुक्रवार को पहले दिन 187 गिद्ध मिले थे, जिसमें सिरमौर रेंज में 70 गिद्ध, हनुमना में 43 गिद्ध, रीवा में 6 गिद्ध व सेमरिया में 68 गिद्ध मिले थे। डभौरा, अतरैला, चाकघाट, मऊगंज में जीरो संख्या गिद्धों की रही। इसी प्रकार दूसरे दिन शनिवार को हुई गणना में 243 गिद्ध मिले हैं, जिसमें डभैरा में 6, सिरमौर 71, अतरैला में 4, हनुमना 40, रीवा में 12, सेमरिया में 110 गिद्ध मिले। चाकघाट व मऊगंज में शून्य संख्या रही। तीसरे दिन रविवार को 261 गिद्ध मिले। डभौरा में 3, अतरैला में 8, सेमरिया 114, सिरमौर में 90, हनुमना में 31, मऊगंज में 30 व रीवा में 12 गिद्ध मिले। चाकघाट में एक भी गिद्ध नहीं मिलें। शीतकालीन गणना 20 से 22 फरवरी तक हुई थी, जिसमें पहले दिन 484, दूसरे दिन 622 व तीसरे दिन 669 गिद्ध मिले थे।
15 वर्षों में कई प्रजातियां हो गईं विलुप्त
गिद्ध प्राकृतिक सफाई करने वाला पक्षी है। गिद्ध मरे हुये पशु को खाते है। इसका पाचन तंत्र बहुत मजबूत होता है। मवेशियों को बीमार होने की स्थिति दर्द निवारक दवा डाइक्लोफेनिक दी जाती थी। मरे मवेशियों को गिद्ध के द्वारा खाने के कारण उनकी भी मौत हो जाती थी। इससे लगातार गिद्ध विलुप्त होते गए। वर्ष 2000 से लेकर 2015 के बीच गिद्ध की विभिन्न प्रजातियां देश में विलुप्त हुई। इसको देखते हुए शासन ने गिद्धों के संरक्षण के लिए कार्ययोजना बनाई हैं। गिद्ध गणना वर्ष 2016 से शुरू की गई है। जिससे गिद्धों के संरक्षण के लिए कार्ययोजना बनाई जा सके। पहले हर दो साल में गिद्धों की गणना की जा रही हैए जिससे गिद्ध आवास की निगरानी की जा सके और उसके आवासों का संरक्षण हो सके। इसके बाद वर्ष 2023 तक वर्ष में एक बार फरवरी में गिद्ध गणना होती थी लेकिन वर्ष 2024 से दो चरणो में गिद्ध गणना कराई जा रही है।
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तीन दिवसीय ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना पूरी हो गई है, पहले दिन 187, दूसरे दिन 243 व तीसरे दिन 261 गिद्ध मिले हैं। कुल 691 गिद्ध मिले हैं।
ह्दयाल सिंह, नोडल अधिकारी वन मंडल रीवा।
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