Gender Ratio: 954 girls were born among 1000 boys in Rewa-Mauganj
विंध्य वाणी,रीवा। बेटा और बेटी के बीच भेदभाव समाप्त करने के लिए स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग भले ही तमाम जागरूकता अभियान चलाकर भेदभाव खत्म करने के प्रयास कर रहे हैं, बावजूद इसके लोग बेटा और बेटी में भेदभाव कर रहे हैं। यह बातें हम नहीं खुद स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट बता रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो वर्ष 2025-26 में अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच रीवा-मऊगंज जिले का जेंडर रेशियो (लिंगानुपात) 954 रहा। यानी 1000 बालकों के बीच 954 बालिकाएं जन्मीं। चालू वर्ष के बीते 10 माह में 22193 बालक और 21179 बालिकाएं पैदा हुई हैं।
1014 फीमेल चाइल्ड कम पैदा हुईं
आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष अप्रैल से जनवरी के बीच मेल चाइल्ड के मुकाबले 1014 फीमेल चाइल्ड का कम जन्म हुआ। वर्ष 2025-26 में भी रीवा जिले का जेंडर रेशियो एक हजार बालकों के बीच 1014 बालिकाओं का था। चालू वर्ष के आंकड़े बताते हैं जेंडर रेशियो में कुछ सुधार हुआ है।
पुत्री मोह में ग्रामीण आगे
पुत्रीमोह की बात करें तो शहरी के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्र के लोग आगे हैं। चिंता की बात यह है कि रीवा व मऊगंज के कई रीवा शहरी क्षेत्र सहित कुछ ब्लॉकों में भी स्थिति खराब है। जवा क्षेत्र का लिंगानुपात 997 है। 1000 बालकों के बीच 997 बालिकाओं ने जन्म लिया। आम तौर पर ऐसी धारणा रहती है कि ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले शहरी लोग अधिक जागरूक माने जाते हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इसके विपरीत हैं।
नए जिले मऊगंज में 981 लिंगानुपात
बता दें कि रीवा से अलग होकर बने नए जिले मऊगंज में बीते 12 माह के आंकड़े रीवा जिले से ठीक हैं। यहां लिंगानुपात रीवा से ज्यादा है। यहां 1000 बालकों के बीच में मात्र 981 बेटियां भी जन्म ली हैं। यहां लोगो में जागरूकता देखी जा रही है।
संस्थावार मेल-फीमेल प्रसव…
संस्था बालक बालिका
रीवा शहरी 9635 9267
गंगेव 1288 1155
हनुमना 1995 1809
जवा 1657 1652
मऊगंज 1976 1939
नईगढ़ी 1303 1294
रायपुर कर्चु. 1084 1046
सिरमौर 1757 1685
त्योंथर 1498 1359
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बेटा-बेटी में फर्क न समझने लोगों को जागरूक किया जा रहा है, पहले से लिंगानुपात में काफी सुधार हुआ है। लोग जागरूक भी हुए हैं।
डॉ.यत्नेष त्रिपाठी, सीएमएचओ रीवा।
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