सीधी: जिले में रेत खदानों का संचालन शुरू होने के साथ ही अवैध रेत परिवहन का काला कारोबार भी चरम पर पहुंच गया है। बिना ट्रांजिट पास (टीपी) के रेत ढोए जाने के कारण शासन को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है, लेकिन खनिज, पुलिस और राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस पर पूरी तरह आंख मूंदकर बैठे हैं।
एक टीपी पर चार-चार फेरे लगाने का खेल सूत्रों के अनुसार, जिले में शक्ति इंटरप्राइजेज (मेरठ, यूपी) कंपनी को गोपद नदी पर कुल 18 रेत खदानों का तीन साल के लिए ठेका मिला है। वर्तमान में कंपनी द्वारा डोल-1, डोल-2, भरूही, पोंड़ी और गोतरा सहित 5 खदानों का संचालन किया जा रहा है।
आरोप है कि कंपनी द्वारा जारी एक ही टीपी पर वाहन चार-चार फेरे लगा रहे हैं, जबकि अधिकांश वाहन बिना किसी टीपी के ही धड़ल्ले से रेत का परिवहन कर रहे हैं। इसके अलावा, गोतरा और अन्य संचालित खदानों में नदी के भीतर मशीनें उतारकर बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन किया जा रहा है, जिससे जलीय जीवों के जीवन पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल नियमों के तहत अवैध रेत परिवहन और ओवरलोडिंग पर रोक लगाने की मुख्य जिम्मेदारी खनिज विभाग की है, जो अक्सर अमले की कमी का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेता है। इसके साथ ही पुलिस और राजस्व विभाग के पास भी ऐसे वाहनों की जांच और कार्रवाई का अधिकार है, लेकिन स्थानीय स्तर पर तीनों विभाग संदिग्ध रूप से चुप्पी साधे हुए हैं। जानकारों का कहना है कि प्रशासनिक मिलीभगत और ‘मैनेजमेंट’ के चलते रेत से भरे वाहन दिन-रात बेखौफ फर्राटे भर रहे हैं।
82.83 करोड़ का है कुल ठेका शक्ति इंटरप्राइजेज ने एमपी स्टेट माइनिंग कार्पोरेशन के साथ 82.83 करोड़ रुपये में तीन साल के लिए यह अनुबंध किया है। कंपनी ने मझौली, कुसमी, गोपद बनास और बहरी तहसीलों में खदानें ली हैं। गत 27 सितंबर 2026 को अनुबंध होने के बाद 1 अक्टूबर 2026 से पडरी और भरुही का संचालन शुरू हुआ था, जिसके बाद से ही अवैध परिवहन और नियमों की अनदेखी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्धजनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से खदानों की जमीनी जांच कराई जाए, मशीनों से हो रहे अवैध उत्खनन पर रोक लगाई जाए और बिना टीपी के चल रहे वाहनों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।




