रीवा। नौकरी दिलाने का झांसा देकर महाराष्ट्र के सतारा जिले ले जाए गए रीवा के पांच नाबालिग बच्चों सहित 10 श्रमिकों को जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से सकुशल मुक्त करा लिया गया। बंधक बनाए जाने की सूचना मिलने के बाद कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने पुलिस अधीक्षक गुरुकरण सिंह से समन्वय कर श्रम विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम महाराष्ट्र भेजी। टीम ने सतारा पुलिस और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से लोणंद तहसील क्षेत्र में कार्रवाई कर सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला और रीवा लेकर आई।
मामला 11 सितंबर को सामने आया, जब सतारा में मौजूद एक नाबालिग ने साहस दिखाते हुए फोन के माध्यम से जिला कलेक्टर को पूरी घटना की जानकारी दी। बच्चे ने बताया कि उसे और अन्य बच्चों को वहां बंधक बनाकर रखा गया है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने बिना देरी किए कार्रवाई शुरू की।
17-18 हजार रुपये वेतन का दिया था लालच
बाल कल्याण समिति के समक्ष बच्चों ने बताया कि स्थानीय एजेंट बृजेश पाल उन्हें काम दिलाने का झांसा देकर महाराष्ट्र ले गया था। उन्हें 17 से 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलने की बात कही गई थी। बच्चों को बताया गया था कि महाराष्ट्र में उन्हें केवल बीयर की बोतलों पर स्टिकर लगाने का काम करना होगा। लेकिन वहां पहुंचने के बाद कथित तौर पर उन्हें गन्ने के खेत में काम करने के लिए भेज दिया गया।
बच्चों के अनुसार, गन्ने के खेत में काम करने से इनकार करने पर बृजेश पाल और सतारा के एक अन्य एजेंट शनि भाऊ ने उन्हें धमकाया। कथित तौर पर कहा गया कि वापस घर जाना है तो परिवार से एक लाख रुपये मंगवाने होंगे, अन्यथा एक साल तक काम करना पड़ेगा। विरोध करने पर मारपीट की धमकी भी दी गई।
एक फोन कॉल ने बदल दी पूरी स्थिति
विषम परिस्थितियों में एक नाबालिग ने हिम्मत दिखाई और अपने गांव में फोन किया। वहां से उसे जिला कलेक्टर का संपर्क नंबर मिला। बच्चे ने कलेक्टर को फोन कर अपने साथ हो रहे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसके बाद प्रशासन ने तत्काल टीम गठित कर महाराष्ट्र रवाना की।
रेस्क्यू टीम में श्रम निरीक्षक अंकुर यादव एवं सुशील कुमार, पुलिस उपनिरीक्षक शैलेन्द्र सिंह तथा आरक्षक गंजन केवट और दुर्गेश नन्दन पांडे शामिल रहे। टीम ने सतारा पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर लोणंद क्षेत्र में रेस्क्यू अभियान चलाया।
रीवा लौटने पर स्वास्थ्य परीक्षण, पुनर्वास की तैयारी
रीवा पहुंचने के बाद सभी श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। उनके रहने और भोजन की तत्काल व्यवस्था की गई। पांचों नाबालिग बच्चों को बाल संरक्षण प्रक्रिया के तहत बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां बच्चों ने पूरी घटना की जानकारी दी।
कलेक्टर ने पुलिस और संबंधित विभागों को बाल दुर्व्यापार, बाल श्रम सहित लागू कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। बच्चों के पुनर्वास और उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ने की प्रक्रिया भी सुनिश्चित करने को कहा गया है।
बच्चों के फालोअप और पुनर्वास में जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन के सहयोगी संगठन अहिंसा वेलफेयर सोसाइटी की भी भूमिका रहेगी। प्रशासन का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनके अधिकारों की रक्षा और शिक्षा से पुन: जोड़ना है।
1098 पर दें तत्काल सूचना
जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी बच्चे को नौकरी या अन्य बहाने से दूसरे जिले अथवा राज्य ले जाने, बाल श्रम कराने, बंधक बनाने या शोषण किए जाने की जानकारी मिले तो तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या पुलिस-प्रशासन को सूचना दें। प्रशासन के अनुसार समय पर मिली सूचना किसी बच्चे को शोषण और तस्करी से बचाने में निर्णायक साबित हो सकती है।




