उच्च शिक्षा विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जैतवारा महाविद्यालय में भुगतान लंबित, प्राचार्य पर मनमानी के आरोप
सतना। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अतिथि विद्वानों का मानदेय समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जाने के बावजूद शासकीय महाविद्यालय जैतवारा में इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। महाविद्यालय के अतिथि विद्वानों ने प्राचार्य पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले दो माह से उनका मानदेय रोका गया है, जबकि पिछले तीन वर्षों से परीक्षा कार्य का पारिश्रमिक भी लंबित है। आर्थिक संकट से जूझ रहे अतिथि विद्वानों ने सामूहिक रूप से प्राचार्य को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र भुगतान की मांग की है!
27 जुलाई 2026 को दिए गए आवेदन में अतिथि विद्वानों ने बताया कि मई और जून 2026 के मानदेय का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। उनका कहना है कि नियमित प्राध्यापकों एवं अन्य कर्मचारियों के वेतन और बिल समय पर पास किए जा रहे हैं, लेकिन अतिथि विद्वानों के भुगतान में लगातार विलंब किया जा रहा है। इससे उनके सामने परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है।

तीन वर्षों से परीक्षा पारिश्रमिक भी लंबित
अतिथि विद्वानों ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि पिछले तीन वर्षों से परीक्षा ड्यूटी का पारिश्रमिक भी उन्हें नहीं मिला है। उनका कहना है कि बार-बार मांग करने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। ऐसे में आर्थिक तंगी के कारण भविष्य में परीक्षा ड्यूटी का निर्वहन करना उनके लिए कठिन होता जा रहा है।
अतिरिक्त संचालक ने पहले ही जारी किए थे निर्देश
इस मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा रीवा संभाग ने 10 जून 2026 को सभी शासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि अतिथि विद्वानों का मानदेय निर्धारित समय पर भुगतान किया जाए। पत्र में कहा गया था कि कुछ महाविद्यालयों से भुगतान में अनावश्यक देरी की शिकायतें मिली हैं, जो शासन के निर्देशों का उल्लंघन है। अतिरिक्त संचालक ने सभी प्राचार्यों को शासन के आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
निर्देशों के बाद भी नहीं बदली व्यवस्था
अतिथि विद्वानों का आरोप है कि अतिरिक्त संचालक के निर्देशों के बाद भी जैतवारा महाविद्यालय में स्थिति जस की तस बनी हुई है। कई बार मौखिक आग्रह और लिखित आवेदन देने के बावजूद मानदेय का भुगतान नहीं किया गया। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर विभागीय आदेशों का पालन क्यों नहीं कराया जा रहा।
परीक्षा कार्य बहिष्कार की चेतावनी
ज्ञापन में अतिथि विद्वानों ने स्पष्ट किया है कि यदि शीघ्र मानदेय और लंबित परीक्षा पारिश्रमिक का भुगतान नहीं किया गया तो वे परीक्षा संबंधी कार्यों से स्वयं को अलग रखने के लिए विवश होंगे। उनका कहना है कि आर्थिक तंगी के बीच बिना भुगतान लगातार सेवाएं देना संभव नहीं है।
जवाबदेही तय करने की मांग
मामले ने उच्च शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अतिथि विद्वानों ने मांग की है कि विभाग इस मामले की जांच कर भुगतान में हो रही देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करे, ताकि भविष्य में किसी भी महाविद्यालय में अतिथि विद्वानों को इस प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़े।




