Arrange for blood quickly… it wasn’t transfused to the patient after being procured
रीवा। जल्दी से खून की व्यवस्था करो, आपकी पत्नी को खून चढ़ाना पड़ेगा… नर्स के तकादे पर पति ने स्वयं का खून दे दिया, किन्तु कई दिन बीतने के बाद भी खून मरीज को चढ़ाया ही नहीं गया। ये वाकया कहीं और का नहीं बल्कि स्वास्थ्य मंत्री के गृह क्षेत्र रीवा के संजय गांधी अस्पताल का है। जहां आने वाले मरीजों से खून चढ़ाने के नाम पर खून तो ले लिया जाता है, किन्तु मरीजों को चढ़ाने की बजाय खून अन्य मरीजों को मनमाने दाम पर बेचा जा रहा है, उक्ताशय का आरोप यहां आने वाले मरीज और उनके अटेंडर ही लगा रहे हैं।
झिरिया निवासी प्रमोद सोधिया ने बताया कि संजय गांधी अस्पताल में उनकी पत्नी शीला को प्रसूति के लिए भर्ती किया गया था। उनके पूर्व से दो बच्चे हैं, जिनकी प्रसूति सीजर से हुई थी। तीसरी प्रसूति के लिए उन्हें संजय गांधी अस्पताल लाया गया। जहां सीजर से प्रसूति तो हो गई, किन्तु नवजात का स्वास्थ्य ठीक नहीं था, उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी, जिसके चलते नवजात को गहन चिकित्सा इकाई में रखा गया।
इधर प्रमोद को वार्ड की नर्स ने मोबाइल लगाकर कहा कि उनकी पत्नी को खून चढ़ाना पड़ेगा इसलिए खून की जल्द व्यवस्था करो, प्रमोद ने अपने एक-दो परिचितों से चर्चा की जब खून की व्यवस्था नहीं हुई तो स्वयं ही रक्तदान करने तैयार हो गए और उन्होंने अस्पताल की रक्तदान शाखा में रक्तदान कर दिया। करीब तीन दिन मौत से संघर्ष करने के बाद नवजात ने दम तोड़ दिया, जबकि शीला सोधिया को आज तक प्रमोद द्वारा दिया खून नहीं चढ़ाया गया। जब प्रसूता को रक्त की इतनी आवश्यकता थी कि उसके पति को खून की जल्द व्यवस्था करने को कहा गया, किन्तु खून मिलने के बाद भी खून क्यों नहीं चढ़ाया गया? ये प्रश्न शीला के पति सहित अन्य परिजनों को भी कचोट रहा है कि कहीं उनकी बहु को खून की चलते कोई परेशानी न हो, कई बार डॉक्टर व नर्स से खून चढ़ाने के लिए तकादा भी किया, किन्तु खून नहीं चढ़ाया।
प्रमोद ने आरोप लगाया कि उनके अलावा अन्य मरीजों से भी इसी प्रकार का व्यवहार संजय गांधी अस्पताल के स्टॉफ द्वारा किया जाता है, वार्ड में भर्ती और भी लोगों को खून की व्यवस्था करने को कहा गया, लोगों ने व्यवस्था भी की, किन्तु उनकी पत्नी सहित अन्य लोगों को भी खून नहीं चढ़ा। जो लोग खून की व्यवस्था नहीं कर पाए उनसे राशि वसूलकर मरीजों को खून चढ़ाया गया। प्रमोद सहित अस्पताल में भर्ती अन्य मरीज के अटेंडरों ने खुलकर खुलकर कहा कि अस्पताल में लोग मरीजों की सुविधा के लिए रक्तदान करते हैं, परन्तु मरीजों को नि:शुल्क रक्त न चढ़ाकर उनसे राशि वसूली जा रही है। किसी से तीन हजार तो किसी से एक यूनिट रक्त का चार रुपया तक वसूला जा रहा है।



