Wheat is being smuggled through the Karhiya Mandi procurement centers.
रीवा। जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। किसानों की मेहनत की फसल की सुरक्षा के लिए बनाए गए खरीदी केंद्रों में अनियमितताओं और गेहूं की संदिग्ध निकासी के आरोपों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली भी सवालोंं के घेरे में है। करहिया मंडी के खरीदी केन्द्रों से चोरी छिपे गेंहू पार किये जाने की भी शिकायते भी मिल रही है। इसमे खरीदी केन्द्रों में काम रहे लोग भी शामिल बताये जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि खरीदी केन्द्रों में अभी भले ही पता नहीं चल पा रहा है लेकिन जब खरीदी बंद होने के बाद गेेंहू शार्ट होगा तो हल्ला मचेगा।

कई किसानों ने भी बताया कि चोरों ने उनकी ट्रैक्टर ट्राली से भी बोरी पार करने की कोशिश की गई लेकिन उसमे वे सफल नहीं हो पाये। किसानों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि शासन ने अधिकारियों को जनता की सेवा पारदर्शिता और शासकीय संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे में यदि किसानों की उपज की सुरक्षा पर ही सवाल खड़े होने लगें तो यह चिंता का विषय है। लोगों का कहना है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों का दायित्व केवल बैठकों तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर भी जाकर सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहिए।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि किसानों से खरीदे गए गेहूं के रखरखाव और भंडारण में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। खरीदी केंद्र से गेंहू की निकासी लंबे समय से जा रही है लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई और बैठकों तक सीमित है। शुरूआती दौर में खरीद केन्द्रों में व्यापक अनियमितताएं सामने आई लेकिन कोई कार्यवाही नहीं होने फिर व्यवस्था पुराने ढर्रे पर पहुंच गई है। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। किसानों का कहना है कि अधिकारी जांच टीम भेजते रहे रिपोर्टें बनती रहीं लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दिया।
इसी बीच खरीदी केंद्रों से अनाज की संदिग्ध आवाजाही की चर्चाएं लगातार सामने आ रहीं हैं। किसान और आम नागरिक अव्यवस्था की जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि दोषियों की पहचान कर कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो सरकारी खरीदी व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर होगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर जवाबदेही तय करता है या फिर यह मामला भी अन्य विवादों की तरह जांच फाइलों तक सिमट कर रह जाता है।




