रीवा। गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल में जच्चा-बच्चा की मौत के मामले की जांच अब अस्पताल के दावों और मौके पर मौजूद लोगों के बयानों के बीच सच्चाई तलाशने की दिशा में आगे बढ़ रही है। भोपाल से आई सात सदस्यीय जांच टीम ने रविवार को लगातार दूसरे दिन अस्पताल में डेरा डाले रखा। टीम ने कल्पना मिश्रा के भर्ती होने से लेकर मौत तक के घटनाक्रम को जोडऩे के लिए ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों के बयान दर्ज किए। इसके साथ ही मृतिका के परिजनों के बयान भी लिए गए।
जांच टीम ने मेडिकल कॉलेज, जीएमएच, ऑपरेशन थिएटर, ब्लड बैंक और सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल तक जाकर रिकॉर्ड और साक्ष्य जुटाए हैं। सीसीटीवी फुटेज भी लिए गए हैं। अब इन रिकॉर्ड का बयानों से मिलान किया जाएगा, जिससे यह पता चल सके कि घटना के दौरान कौन-कहां मौजूद था और इलाज की प्रक्रिया में क्या हुआ।
मामले में निलंबित डॉ.निधि पांडेय ने अपने बयान में कहा है कि जब उन्हें कल्पना मिश्रा के ऑपरेशन की जानकारी मिली, उस समय वह सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में एक अन्य केस में एनेस्थीसिया देने के लिए तैनात थीं। सूचना मिलने के बाद वह जीएमएच पहुंचीं लेकिन तब तक कुछ समय गुजर चुका था। जांच टीम ने उनके इस दावे को भी गंभीरता से लिया है। टीम सुपर स्पेशलिटी पहुंची और वहां डॉ.निधि की ड्यूटी से संबंधित दस्तावेज तथा अन्य जानकारी जुटाई। अब यह देखा जाएगा कि उनके बयान के मुताबिक घटना के समय वह वास्तव में कहां तैनात थीं और जीएमएच पहुंचने में कितना समय लगा। वहीं निलंबित ड्यूटी डाक्टर डॉ.सोनल अग्र्रवाल के संबंध में भी पूछतांछ की जा रही है।
मास्क के कारण स्टाफ की पहचान में उलझन
जांच के दौरान परिजनों से ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की पहचान भी कराई गई। परिजनों ने कई लोगों को पहचानने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि घटना के समय अधिकांश स्टाफ ने मास्क लगा रखा था, जबकि अब सामान्य स्थिति में सामने आने पर उनकी पहचान कर पाना मुश्किल हो रहा है। एक परिजन ने आरोप लगाया कि पहचान के लिए कुछ ऐसे लोगों को भी बुलाया गया, जो घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे। यह आरोप भी जांच का हिस्सा बन सकता है और ड्यूटी चार्ट व सीसीटीवी फुटेज से इसकी वास्तविकता सामने आ सकती है।
परिजनों ने जांच के तरीके पर भी उठाए सवाल
परिवार के पांच सदस्यों ने जांच टीम के सामने अपने बयान दर्ज कराए और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। परिजनों का आरोप है कि बयान दर्ज करते समय जांच दल के सदस्य अपने हिसाब से बयान लिखवाने का प्रयास कर रहे थे। परिजनों ने कैशलेस डिलीवरी के बावजूद बाहर से किट और दवाएं मंगाए जाने तथा अतिरिक्त राशि की मांग किए जाने की बात भी अधिकारियों के सामने रखी। परिजनों के अनुसार जब उन्होंने इन बिंदुओं को अपने बयान में शामिल कराने का प्रयास किया तो कथित तौर पर उन्हें कहा गया कि जितना पूछा जाए, केवल उतना ही जवाब दें।
अब रिकॉर्ड बताएगा कौन सही, कौन गलत?
जांच टीम के सामने सबसे अहम सवाल यही है कि कल्पना मिश्रा के इलाज के दौरान अस्पताल में वास्तव में क्या हुआ। डॉक्टरों और स्टाफ के बयान, परिजनों के आरोप, ड्यूटी चार्ट, सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड और ब्लड बैंक के दस्तावेजों का मिलान इस जांच की दिशा तय करेगा। सात सदस्यीय टीम में गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल की गायनी विभाग की एचओडी डॉ.रेखा बाधवानी, डॉ.शबाना सुल्तान, डॉ. शैलेन्द्र नेमा, जबलपुर के डॉ.भगवान सिंह यादव, डॉ. श्वेता सिरसीकर, एनएचएम के डॉ.पंकज बुधौलिया और रीवा के जेडी हेल्थ डॉ.जीएस परिहार शामिल हैं। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मौत की वजह क्या रही और इलाज के दौरान किस स्तर पर लापरवाही या प्रक्रिया संबंधी चूक हुई।
00000




